थत्यूड़ की रामलीला में गूंजे जय श्रीराम के जयकारे, शबरी मिलन और बाली-सुग्रीव युद्ध ने मोहा मन
80 साल से अटूट परंपरा निभा रहा थत्यूड़ का रामलीला मंचन, दसवें दिन खचाखच भरा पंडाल; एस सजवान प्रोडक्शन के जरिए देश-विदेश तक पहुंच रही प्रभु श्रीराम की लीला

रिपोर्ट—मुकेश रावत
थत्यूड़ (टिहरी गढ़वाल)। पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत, आस्था और भक्ति का अनूठा संगम देखना हो तो जौनपुर ब्लॉक मुख्यालय थत्यूड़ की रामलीला इसका जीवंत उदाहरण है। यहां प्रभु श्रीराम की लीला केवल मंचन नहीं, बल्कि आठ दशक पुरानी परंपरा और जन-जन की आस्था का प्रतीक बन चुकी है। रामलीला के दसवें दिन शबरी मिलन, हनुमान-श्रीराम मिलन और बाली-सुग्रीव युद्ध के मनमोहक दृश्यों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कलाकारों के शानदार अभिनय पर पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी थत्यूड़ में श्रीरामलीला का भव्य आयोजन किया जा रहा है। 22 अक्टूबर को शुरू हुई रामलीला में शनिवार रात दसवें दिन की लीला देखने के लिए बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उमड़े। दर्शकों के उत्साह का आलम यह रहा कि पूरा पंडाल खचाखच भरा नजर आया। प्रभु श्रीराम के जयकारों और तालियों के बीच कलाकारों ने मंच पर ऐसे जीवंत दृश्य प्रस्तुत किए कि दर्शक देर रात तक लीला में डूबे रहे।
शबरी मिलन ने भावुक किए दर्शक, हनुमान-श्रीराम मिलन पर गूंजा पंडाल
दसवें दिन की लीला में शबरी की भक्ति और प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा का दृश्य दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहा। वहीं, हनुमान जी और भगवान श्रीराम के मिलन ने भक्तिमय माहौल को और भी भावपूर्ण बना दिया। बाली-सुग्रीव युद्ध के शानदार मंचन ने भी दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। कलाकारों के संवाद, अभिनय और प्रस्तुति पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं।
रामलीला के मंच पर प्रस्तुत इन प्रसंगों ने जहां दर्शकों को त्रेतायुग की याद दिलाई, वहीं भक्ति, समर्पण, मित्रता और धर्म की रक्षा का संदेश भी दिया।
80 साल से कायम है रामलीला की परंपरा
रामलीला समिति के महासचिव सुनील सजवान ने बताया कि थत्यूड़ में रामलीला का आयोजन पिछले 80 वर्षों से निरंतर किया जा रहा है। पीढ़ियां बदलती रहीं, लेकिन प्रभु श्रीराम की लीला के प्रति लोगों की आस्था और उत्साह आज भी बरकरार है। क्षेत्रवासियों के सहयोग से इस सांस्कृतिक परंपरा को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अब एस सजवान प्रोडक्शन के माध्यम से रामलीला का लाइव प्रसारण भी किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र से बाहर रहने वाले लोग और देश-विदेश में मौजूद श्रद्धालु भी घर बैठे प्रभु श्रीराम की लीला का आनंद ले सकें। डिजिटल माध्यम से रामलीला को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की यह पहल स्थानीय संस्कृति और धार्मिक परंपरा को नई पहचान दे रही है।
युवाओं को दिया संदेश, नशे से दूर रहकर प्रभु श्रीराम के आदर्श अपनाएं
महासचिव सुनील सजवान ने युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वह गलत रास्तों को छोड़कर भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाए। उन्होंने कहा कि रामायण हमें मर्यादा, सत्य, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा की सीख देती है। युवाओं को नशे से दूर रहकर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, ताकि वे अपने परिवार, समाज और क्षेत्र का नाम रोशन कर सकें।
जनप्रतिनिधियों और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने बढ़ाया उत्साह
रामलीला के दसवें दिन व्यापार मंडल के पदाधिकारी, डांडी-कांठी क्लब के पदाधिकारी, धनोल्टी-जौनपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारी, रामलीला समिति के अध्यक्ष गजेंद्र असवाल, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे।



