थत्यूड

क्या किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा प्रशासन? देवलसारी रोड बनी मौत का रास्ता

पर्यटन को बढ़ावा देने के दावे हवा-हवाई, देवलसारी-नागटिब्बा मार्ग पर गड्ढे, मलबा और खतरा ही खतरा; ग्रामीणों ने उठाए सवाल

रिपोर्ट -मुकेश रावत 

थत्यूड़। उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जौनपुर विकासखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल देवलसारी और नागटिब्बा को जोड़ने वाला दुडगा पूल-बंगशील मोटर मार्ग इन दिनों बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जिसे देखकर कोई भी हैरान हो जाए।

 

लगातार हो रही बारिश ने सड़क की पोल पूरी तरह खोल दी है। जगह-जगह मलबे के ढेर, सड़क पर बिखरे बड़े पत्थर और गहरे गड्ढे राहगीरों के लिए खतरे की घंटी बने हुए हैं। हालात ऐसे हैं कि हर सफर दुर्घटना के डर के साए में तय हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की सुध नहीं ली गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

 

सबसे हैरानी की बात यह है कि इस सड़क के सुधारीकरण और डामरीकरण की स्वीकृति करीब एक वर्ष पहले मिल चुकी है। निविदा प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, लेकिन धरातल पर काम की रफ्तार इतनी धीमी है कि लोगों को अब सरकारी व्यवस्था पर ही सवाल उठाने पड़ रहे हैं।

 

यह वही सड़क है जो प्रदेश के दो प्रमुख पर्यटन स्थलों देवलसारी और नागटिब्बा को जोड़ती है। हर वर्ष यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन सड़क की वर्तमान हालत देखकर पर्यटक भी दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटन बढ़ाने की बातें तो खूब होती हैं, लेकिन पर्यटकों को सुरक्षित सड़क उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?

 

सड़क निर्माण कार्य से जुड़े विजेंद्र पवार का कहना है कि लगातार हो रही बारिश के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है। जितना काम किया जाता है, बारिश उसे नुकसान पहुंचा देती है। हालांकि ग्रामीणों का सवाल है कि यदि मौसम ही बाधा है तो विभाग वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं कर रहा?

 

भाजपा मंडल अध्यक्ष सुनील थपलियाल, मनवीर परमार, राजेंद्र राणा और शेर सिंह डोगरा सहित कई जनप्रतिनिधियों ने शासन-प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से तत्काल सड़क का सुधारीकरण एवं डामरीकरण कराने की मांग की है।

 

उधर लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता राजेंद्र टम्टा ने बताया कि कार्य में देरी को लेकर संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी किया गया है और जल्द कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल नोटिस से सड़क ठीक हो जाएगी या फिर विभाग मौके पर उतरकर जनता को राहत भी देगा?

 

अब क्षेत्रवासियों की निगाहें शासन और प्रशासन पर टिकी हैं। आखिर कब तक लोग जान जोखिम में डालकर इस सड़क पर सफर करने को मजबूर रहेंगे और कब तक पर्यटन क्षेत्र की यह बदहाली सरकारी फाइलों में ही दबी रहेगी?

 

—– सवाल——

1. जब दुडगा पूल-बंगशील मोटर मार्ग एक साल पहले स्वीकृत हो चुका था, तो आज तक इसका निर्माण कार्य पूरा क्यों नहीं हुआ?

2. देवलसारी और नागटिब्बा जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाली सड़क की बदहाली के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है—ठेकेदार, विभाग या प्रशासन?

3. क्या लोक निर्माण विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, तभी सड़क की सुध ली जाएगी?

4. ठेकेदार को नोटिस भेजने के बाद विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की और सड़क कब तक पूरी तरह दुरुस्त होगी?

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