उत्तराखंड

देहरादून महायोजना-2041 पर उमड़ा जनसैलाब, रायपुर के लोगों ने विकास का रोडमैप सौंपा

एमडीडीए की जनसुनवाई में करीब 100 लोगों ने दिए सुझाव, विधायक उमेश शर्मा काऊ बोले— जनभागीदारी से बनेगी बेहतर महायोजना

देहरादून। राजधानी के भविष्य को आकार देने वाली देहरादून महायोजना-2041 को लेकर मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की जनसुनवाई में लोगों का उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार को किशनपुर स्थित लक्सूरिया फार्म हाउस में आयोजित छठे जनसंवाद शिविर में रायपुर क्षेत्र के नागरिकों, भू-स्वामियों और जनप्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। करीब 100 लोगों ने सड़क, ट्रैफिक, पार्किंग, जल निकासी, हरित क्षेत्र, पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की शहरी जरूरतों को लेकर अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराईं।

शिविर में एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी, सचिव मोहन सिंह बर्निया सहित प्राधिकरण के अधिकारी मौजूद रहे। सभी सुझावों का विधिवत रिकॉर्ड तैयार किया गया और भरोसा दिलाया गया कि हर सुझाव का तकनीकी एवं विधिक परीक्षण कर महायोजना में शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

रायपुर के विकास मुद्दों को विधायक ने रखा प्रमुखता से

जनसुनवाई में रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते देहरादून की योजनाएं स्थानीय जरूरतों और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार होनी चाहिए। उन्होंने रायपुर क्षेत्र में यातायात, आधारभूत सुविधाओं, पर्यावरण संरक्षण और संतुलित शहरी विकास को महायोजना में प्राथमिकता देने की मांग उठाई।

21 जुलाई तक चलेगा जनसंवाद अभियान

एमडीडीए का जनसंवाद अभियान 6 से 21 जुलाई तक शहर के विभिन्न सेक्टरों में जारी रहेगा। इसका उद्देश्य आम नागरिकों, भू-स्वामियों और व्यापारिक संगठनों को सीधे योजना निर्माण से जोड़ना है। अभियान का अगला जनसुनवाई शिविर 14 जुलाई को जीआरडी यूनिवर्सिटी, राजपुर रोड में आयोजित किया जाएगा।

बंशीधर तिवारी बोले— जनता के सुझाव तय करेंगे शहर का भविष्य

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून महायोजना-2041 केवल नक्शा नहीं बल्कि आने वाले वर्षों के विकास का विजन डॉक्यूमेंट है। नागरिकों से मिल रहे सुझावों के आधार पर ऐसी योजना तैयार की जाएगी जो विकास और पर्यावरण के बीच बेहतर संतुलन स्थापित कर सके।

मोहन सिंह बर्निया का आश्वासन

एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्रत्येक सुझाव और आपत्ति का निष्पक्ष परीक्षण किया जाएगा। महायोजना का उद्देश्य केवल शहरी विस्तार नहीं, बल्कि देहरादून की प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए सतत और व्यवस्थित विकास सुनिश्चित करना है।

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