सकलाना में उमड़ा जनसैलाब, शहीद नागेंद्र दत्त सकलानी मेले में संस्कृति और श्रद्धा का महासंगम
राजकीय मेले में झलकी पहाड़ की परंपरा, नेताओं के संबोधन और कलाकारों की प्रस्तुतियों ने बनाया यादगार माहौल

थत्यूड़ (टिहरी गढ़वाल): जौनपुर ब्लॉक के सकलाना क्षेत्र में मंगलवार को शहीद नागेंद्र दत्त सकलानी स्मृति मेला का भव्य आगाज पूजारगांव इंटर कॉलेज के प्रांगण में हुआ। दो दिवसीय इस मेले का शुभारंभ अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष संजय नेगी, राज्य युवा कल्याण परिषद के राज्य मंत्री विनोद सुयाल, मेला समिति अध्यक्ष अरविंद सकलानी व महासचिव कमलेश सकलानी ने संयुक्त रूप से शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन कर किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि संजय नेगी ने पशुपालन, उद्यान, कृषि, पर्यटन, बाल विकास, एनआरएलएम और स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
मेले में क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। उत्कृष्ट प्रस्तुतियों पर मेला समिति द्वारा बच्चों को सम्मानित भी किया गया।
लोक संस्कृति की छटा उस समय और निखर उठी जब उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक कलाकार अर्जुन सेमल्याट ने “ओहो देवा महाशु देवा”, “सुरकंडा मैय्या” जैसे गीतों की प्रस्तुति दी। वहीं रेनू काठी के गीतों ने भी माहौल को भावविभोर कर दिया।
संजय नेगी ने मेला समिति को बधाई देते हुए खुद को क्षेत्र का बेटा बताते हुए कहा कि वह हमेशा परिवार के सदस्य की तरह क्षेत्र के साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने मेले के बढ़ते स्वरूप की सराहना करते हुए बाहरी व्यापारियों से अनुशासन बनाए रखने और सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग की अपील की। साथ ही उन्होंने बताया कि यह मेला अब राजकीय मेला घोषित हो चुका है और क्षेत्रीय विकास के लिए प्रयास जारी हैं। सकलाना में डिग्री कॉलेज खोलने का आश्वासन भी उन्होंने दिया।
राज्य मंत्री विनोद सुयाल ने अपने संबोधन में कहा कि पारंपरिक मेले हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं और नई पीढ़ी को शहीदों के त्याग से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है।
मेले का इतिहास और महत्व:
यह मेला केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि शहीद नागेंद्र दत्त सकलानी के बलिदान की स्मृति और सम्मान का प्रतीक है। वर्ष 1948 में उनकी शहादत के बाद, स्वतंत्रता सेनानी डॉ. कुशालानंद गैरोला ने पैदल यात्रा कर पूजारगांव पहुंचकर उनकी स्मृति में वैशाख माह की 15 गते को इस मेले की शुरुआत की थी। तब से यह परंपरा निरंतर जारी है।
मेला समिति अध्यक्ष अरविंद सकलानी ने बताया कि लंबे प्रयासों के बाद इस मेले को उत्तराखंड सरकार द्वारा टिहरी गढ़वाल का तीसरा राजकीय मेला घोषित किया गया है।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सीता मनवाल सदस्य जिला पंचायत, ओंकार सिंह नकोटी, अनुसूया प्रसाद उनियाल, मदन मोहन सेमवाल, राकेश उनियाल (ओबीसी आयोग सदस्य), सुनील सजवाण, ऋषि राम सेमवाल, गंभीर सिंह नेगी, विवेक सकलानी, अनिल बिष्ट, अनिल हटवाल, बलवीर नकोटी, ग्राम प्रधान लाखी राम चमोली, वीरपाल कठैत, रश्मि सकलानी, विनीता उनियाल, सुमति देवी समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



