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टिहरी में पिरूल बनेगा रोजगार का साधन, डीएम ने 30 अप्रैल तक मांगी ठोस कार्ययोजना

वनाग्नि नियंत्रण के साथ आय सृजन पर जोर, सभी विकासखंडों में पिरूल संग्रहण की मॉनिटरिंग के निर्देश

टिहरी गढ़वाल, 24 अप्रैल 2026 : जनपद टिहरी गढ़वाल में पिरूल (चीड़ की सूखी पत्तियों) के प्रभावी प्रबंधन को लेकर प्रशासन अब मिशन मोड में काम करेगा। शुक्रवार को कलेक्ट्रेट के वीसी कक्ष में जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में पिरूल संग्रहण, निस्तारण और उससे रोजगार सृजन के अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पिरूल का सुनियोजित ढंग से संग्रहण सुनिश्चित किया जाए, जिससे एक ओर जहां वनाग्नि की घटनाओं पर नियंत्रण पाया जा सके, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए स्रोत विकसित हों। उन्होंने सभी विकासखंडों में पिरूल कलेक्शन की नियमित मॉनिटरिंग करने और समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

बैठक में यह भी तय किया गया कि प्रभागीय वनाधिकारी 30 अप्रैल तक विस्तृत रूट प्लान तैयार करेंगे, ताकि पिरूल संग्रहण कार्य को व्यवस्थित रूप से संचालित किया जा सके। साथ ही सभी खंड विकास अधिकारी (BDO) और खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को अपने-अपने क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर कार्ययोजना बनाकर उसे प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए।

इस दौरान नोएडा से आए टेक्नोलॉजी पार्टनर ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से “Pellet Buyback Program” की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिरूल से ब्रिकेट और पेललेट निर्माण कर न केवल जंगलों में आग के खतरे को कम किया जा सकता है, बल्कि इससे स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

जिलाधिकारी ने इस पहल को जनपद में मिशन मोड में लागू करने पर जोर देते हुए कहा कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए और जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों को भी इस अभियान से जोड़ा जाए।

बैठक में डीएफओ टिहरी पुनीत तोमर, डीएफओ नरेंद्रनगर दिगंत नायक, डीएफओ संदीपा सहित सभी बीडीओ और बीईओ भौतिक एवं वर्चुअल माध्यम से मौजूद रहे।

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