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वन मंत्री सुबोध उनियाल सख्त, बोले—योजनाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, समयबद्ध क्रियान्वयन हर हाल में हो

वन मुख्यालय में समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को दिए स्पष्ट निर्देश, मानव-वन्यजीव संघर्ष, वनीकरण, वनाग्नि नियंत्रण और जैव विविधता संरक्षण पर तेज़ी से काम करने पर जोर

देहरादून। उत्तराखंड की वन संपदा के संरक्षण और विभागीय योजनाओं में तेजी लाने के उद्देश्य से वन मंत्री सुबोध उनियाल ने शुक्रवार को राज्य वन मुख्यालय में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए कि विभाग की सभी योजनाओं का पारदर्शी, प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि योजनाओं में किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

समीक्षा बैठक में वन संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष, जैव विविधता संरक्षण, वनीकरण, प्राकृतिक पुनर्वनीकरण और वनाग्नि प्रबंधन सहित विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया।

वन मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध वन संपदा राज्य की सबसे बड़ी धरोहर है और इसका संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संवेदनशील क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाए तथा स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने वनीकरण और प्राकृतिक पुनर्वनीकरण के कार्यों में तेजी लाने के साथ ही वनाग्नि की रोकथाम के लिए प्रभावी रणनीति अपनाने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल वन विभाग का दायित्व नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।

बैठक के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की। वन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, वन्यजीवों की सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित एवं समृद्ध उत्तराखंड के निर्माण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

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