टिहरी गढ़वाल

ढाई साल बाद भी सड़क का इंतजार, 10–15 दिन में एक दिन पानी! बीमार महिला को डंडी से पहुंचाया सड़क तक

बीमार महिला को डंडी के सहारे सड़क तक पहुंचाने की नौबत, पूर्व प्रधान भाग सिंह भंडारी ने फेसबुक वीडियो के जरिए उठाए सवाल; 70 से 75 परिवार बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान

रिपोर्ट — मुकेश रावत

थत्यूड़ (टिहरी गढ़वाल)। पहाड़ों से पलायन रोकने और गांव-गांव तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। जौनपुर क्षेत्र के प्रवेश द्वार के रूप में पहचाने जाने वाले रौतू की बेली गांव के चलीधार क्षेत्र में सड़क और पेयजल की समस्या से ग्रामीण जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब दो किलोमीटर सड़क स्वीकृत होने के ढाई साल बाद भी उन्हें इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है। वहीं, जल जीवन मिशन के तहत नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं होने से लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।

गांव के पूर्व प्रधान भाग सिंह भंडारी ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर वीडियो साझा कर क्षेत्र की समस्याओं को सामने रखा है। वीडियो में बीमार महिला सुमित्रा देवी को डंडी के सहारे सड़क तक पहुंचाने की घटना का उल्लेख किया गया है। बताया गया कि बलवीर लुगवाल की पत्नी सुमित्रा देवी की तबीयत बिगड़ने पर ग्रामीणों को उन्हें सड़क तक पहुंचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। यह घटना पहाड़ी गांवों में सड़क संपर्क की अहमियत और आपातकालीन परिस्थितियों में आने वाली कठिनाइयों को उजागर करती है।

70 से 75 परिवारों के लिए आज भी चुनौती बना सड़क संपर्क

पूर्व प्रधान भाग सिंह भंडारी के अनुसार, चलीधार क्षेत्र में करीब 70 से 75 परिवार निवास करते हैं। गांव को जोड़ने वाली लगभग दो किलोमीटर सड़क की स्वीकृति मिलने पर ग्रामीणों को उम्मीद थी कि आवागमन आसान होगा और बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने में भी राहत मिलेगी। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि ढाई साल बीतने के बाद भी उनकी समस्याएं दूर नहीं हो पाई हैं।

ग्रामीण अब जानना चाहते हैं कि सड़क निर्माण की वर्तमान स्थिति क्या है और उन्हें इसका लाभ कब तक मिल सकेगा। सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को रोजमर्रा के आवागमन से लेकर आपातकालीन परिस्थितियों तक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

छह साल से जल जीवन मिशन, फिर भी 10 से 15 दिन में एक दिन पानी

चलीधार क्षेत्र में पेयजल संकट भी गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। भाग सिंह भंडारी का कहना है कि जल जीवन मिशन शुरू हुए करीब छह साल हो चुके हैं, लेकिन क्षेत्र में पानी की नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही है। उनके अनुसार, ग्रामीणों को 10 से 15 दिन में केवल एक दिन पानी मिल रहा है।

यदि ग्रामीणों की यह शिकायत सही है, तो यह पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी और योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। घर-घर नल से जल पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित योजना के बावजूद लोगों को कई-कई दिनों तक पानी का इंतजार करना पड़े, तो संबंधित विभाग को आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा कर समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।

पलायन रोकने के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं का इंतजार

पूर्व प्रधान भाग सिंह भंडारी ने वीडियो में कहा कि चलीधार क्षेत्र का सहारा नहीं होता, तो गांव के कई परिवार वर्षों पहले ही पलायन कर चुके होते। उनका यह कथन पहाड़ के उन ग्रामीणों की पीड़ा को सामने लाता है, जो तमाम कठिनाइयों के बावजूद अपनी जन्मभूमि से जुड़े हुए हैं।

एक ओर पहाड़ों में पलायन रोकने के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर सड़क और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए ग्रामीणों को संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब गांव में रहना ही मुश्किल हो जाए, तो लोग अपनी जन्मभूमि में आखिर कब तक टिके रहेंगे?

पलायन रोकने के लिए केवल योजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है। गांवों में सड़क, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है, ताकि ग्रामीणों को बुनियादी जरूरतों के लिए परेशान न होना पड़े।

आरोप-प्रत्यारोप नहीं, विकास के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

भाग सिंह भंडारी ने गांव के विकास से जुड़े मुद्दों पर आपसी आलोचना और आरोप-प्रत्यारोप के बजाय समस्याओं के समाधान पर ध्यान देने की अपील भी की है। उनका कहना है कि गांव के विकास के लिए प्रयास करने वालों को भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है।

ऐसे में जरूरी है कि आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर सड़क, पेयजल और पलायन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सामूहिक प्रयास किए जाएं। ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान तभी संभव है, जब संबंधित विभाग, जनप्रतिनिधि और स्थानीय स्तर पर सक्रिय लोग मिलकर ठोस पहल करें।

शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से ग्रामीणों के सवाल

रौतू की बेली गांव के चलीधार क्षेत्र की समस्याओं को लेकर अब संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों से जवाबदेही की अपेक्षा की जा रही है।

  • करीब दो किलोमीटर सड़क की स्वीकृति के ढाई साल बाद निर्माण की स्थिति क्या है?
  • सड़क निर्माण पूरा करने के लिए क्या समयसीमा तय की गई है?
  • जल जीवन मिशन के तहत नियमित पेयजल आपूर्ति क्यों नहीं हो पा रही है?
  • 10 से 15 दिन में एक दिन पानी मिलने की शिकायत पर विभाग ने क्या कार्रवाई की है?
  • ग्रामीणों को सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए क्या ठोस कार्ययोजना है?

इन सवालों का जवाब केवल आश्वासनों से नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाली कार्रवाई से मिलना चाहिए। सड़क निर्माण और पेयजल आपूर्ति की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष भी सामने आना जरूरी है।

अब ग्रामीणों को कार्रवाई का इंतजार

पूर्व प्रधान भाग सिंह भंडारी की फेसबुक पोस्ट के माध्यम से सामने आई चलीधार क्षेत्र की समस्याओं ने एक बार फिर पहाड़ी गांवों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी आवाज शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचेगी और सड़क व पेयजल संकट के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

विकास का आकलन केवल योजनाओं की स्वीकृति और घोषणाओं से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि उनका लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं।

सबसे बड़ा सवाल यही है—जब ग्रामीणों को सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी वर्षों इंतजार करना पड़े, तो पहाड़ से पलायन कैसे रुकेगा?

 

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