वन्यजीवों के प्राकृतिक गलियारे न रोकें, विकास के साथ पर्यावरण का भी रखें ध्यान: राज्यपाल
वन्यजीव सप्ताह-2026 के समापन पर राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा- मानव-वन्यजीव संघर्ष का समाधान सह-अस्तित्व में, तकनीक से संरक्षण को मिलेगा नया आयाम

देहरादून, 08 अक्टूबर। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल वन्यजीवों को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से सीधे जुड़ा विषय है। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसा उत्तराखंड तैयार करना होगा, जहां विकास की रफ्तार कायम रहे, लेकिन वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन के रास्ते बाधित न हों।
राज्यपाल गुरुवार को लोक भवन में आयोजित वन्यजीव सप्ताह-2026 के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उत्तराखंड वन विभाग की ओर से प्रत्येक वर्ष अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में वन्यजीव सप्ताह मनाया जाता है। इस वर्ष एक अक्टूबर को आईसीएफआरई के सहयोग से आईसीएफआरई ऑडिटोरियम देहरादून में कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ था, जिसका समापन गुरुवार को राज्यपाल ने लोक भवन में किया।
प्राकृतिक आवास और गलियारों का संरक्षण जरूरी
राज्यपाल ने कहा कि वन्यजीवों को केवल संरक्षित क्षेत्रों तक सीमित रखकर उनका संरक्षण संभव नहीं है। बाघों के लिए स्वस्थ जंगल, हाथियों के लिए सुरक्षित गलियारे, पक्षियों के लिए सुरक्षित आकाश और सभी वन्यजीवों के लिए स्वच्छ जल एवं आपस में जुड़े प्राकृतिक आवास आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा कि यदि वन्यजीवों को पर्याप्त भोजन, सुरक्षित आवास और आवागमन के प्राकृतिक रास्ते उपलब्ध नहीं होंगे तो वे मानव बस्तियों की ओर आने के लिए मजबूर होंगे। ऐसे में मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ सकता है। इसका समाधान संघर्ष को बढ़ाने में नहीं, बल्कि वन्यजीवों की जरूरतों को समझते हुए सह-अस्तित्व का रास्ता अपनाने में है।
एआई और आधुनिक तकनीक से मजबूत होगा वन्यजीव संरक्षण
राज्यपाल ने कहा कि 21वीं सदी में तकनीक ने वन्यजीव संरक्षण के लिए नई संभावनाएं खोली हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कैमरा ट्रैप, रिमोट सेंसिंग, जियोस्पेशियल मैपिंग, कॉलर आइडेंटिफिकेशन और आधुनिक डेटा विश्लेषण जैसी तकनीकों की मदद से वन्यजीवों की गतिविधियों, आवागमन और व्यवहार को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल से मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और मनुष्य तथा वन्यजीव दोनों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने में मदद मिलेगी।
मानव-वन्यजीव संघर्ष के समाधान पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष के समाधान के लिए मनुष्य और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा। उत्तराखंड सरकार द्वारा मानव-वन्यजीव संघर्ष को आपदा के रूप में स्वीकार करना और जिला स्तर पर न्यूनीकरण एवं प्रबंधन समितियों का गठन इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
वन्यजीव संरक्षण में योगदान देने वाले कार्मिक सम्मानित
समारोह में राज्यपाल ने वन एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वन विभाग के कार्मिकों को सम्मानित किया। इस दौरान बिनसर वन्यजीव अभयारण्य, अल्मोड़ा के लोगो का भी विमोचन किया गया।
प्रमुख वन संरक्षक (HoFF) कपिल लाल ने कहा कि वन्यजीव सप्ताह का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के साथ आमजन की सहभागिता सुनिश्चित करना है। इस वर्ष की थीम “जुड़े हुए आवास, समृद्ध वन्यजीवन” रखी गई है, जिसके तहत संरक्षित क्षेत्रों के साथ वन्यजीव गलियारों और प्राकृतिक आवासों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीवों के साथ मानव आबादी की निकटता के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती बनी हुई है। इसके न्यूनीकरण के लिए वन विभाग लगातार प्रयास कर रहा है।
कार्यक्रम में सांसद नरेश बंसल, सचिव सी. रविशंकर, प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) नीना ग्रेवाल सहित वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।



