उत्तराखंड

टिहरी झील में सुरक्षा व्यवस्था की खुली पोल, डीएम नितिका खंडेलवाल ने बोटिंग प्वाइंट पर मारा छापा

तेल रखने की जगह सुरक्षा उपकरण न अग्नि सुरक्षा संकेतक; भुगतान व्यवस्था और टाडा के अभिलेखों में भी मिलीं खामियां, जांच के लिए एसडीएम की अध्यक्षता में समिति गठित

टिहरी गढ़वाल, 16 अक्टूबर। टिहरी झील में पर्यटकों की सुरक्षा और पर्यटन गतिविधियों के संचालन में लापरवाही को लेकर जिला प्रशासन सख्त हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने शुक्रवार को कोटी कॉलोनी स्थित टिहरी झील के बोटिंग प्वाइंट का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान सुरक्षा मानकों, भुगतान व्यवस्था और बोटिंग संचालन से संबंधित अभिलेखों में कई कमियां सामने आईं। डीएम ने जिला पर्यटन विकास अधिकारी से स्पष्टीकरण तलब करते हुए व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

तेल भंडारण स्थल पर सुरक्षा इंतजाम नदारद

निरीक्षण के दौरान बोटिंग संचालन में इस्तेमाल होने वाले तेल को रखने के स्थान पर आवश्यक सुरक्षा उपकरण नहीं मिले। तेल के रखरखाव की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई। इसके अलावा अग्नि सुरक्षा संबंधी संकेतकों का भी अभाव मिला।

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को बोटिंग स्थल पर आवश्यक सुरक्षा संकेतक लगाने, अग्निशमन यंत्र उपलब्ध कराने और टिकट काउंटर पर तत्काल सीसीटीवी कैमरा स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए टिकट काउंटर की व्यवस्था दुरुस्त करने को भी कहा।

व्यक्तिगत खातों में भुगतान पर रोक, क्यूआर कोड से होगी वसूली

बोटिंग के भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पर्यटकों से भुगतान केवल टिहरी विशेष क्षेत्र पर्यटन विकास प्राधिकरण (टाडा) अथवा पंजीकृत बोट यूनियन के अधिकृत खाते में ही लिया जाए। इसके लिए अधिकृत क्यूआर कोड उपलब्ध कराने को कहा गया है।

व्यवस्था पूरी होने तक सभी भुगतान टाडा के सरकारी खाते के क्यूआर कोड के माध्यम से ही लेने के निर्देश दिए गए। बोट संचालकों के समूह में व्यक्तिगत स्तर पर भुगतान लेने की व्यवस्था को अनुचित बताते हुए इसमें तत्काल सुधार करने को कहा गया।

सूर्यास्त के बाद बोटिंग और जेट स्की पर सख्ती

डीएम ने सूर्यास्त के बाद भी बोटिंग और जेट स्की संचालित किए जाने की शिकायतों को गंभीरता से लिया। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्धारित समय के बाद इन गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। सूर्यास्त होते ही टिकट काउंटर बंद किया जाए और इसके बाद किसी भी पर्यटक को बोटिंग की अनुमति न दी जाए।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पर्यटकों की संख्या अधिक होने का हवाला देकर सुरक्षा मानकों में किसी प्रकार की ढील नहीं दी जा सकती। नियमों का उल्लंघन कर देर शाम तक बोटिंग या जेट स्की संचालित करने वाले संचालकों के लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए।

टाडा कार्यालय में अभिलेखों की जांच, समिति गठित

बोटिंग प्वाइंट के निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी ने टाडा कार्यालय का भी औचक निरीक्षण किया। यहां बोटिंग से संबंधित अभिलेख, सेवा प्रमाणपत्र और लेखा मिलान यानी अकाउंट रिकन्सिलिएशन के दस्तावेज अद्यतन एवं संतोषजनक नहीं पाए गए।

प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए उपजिलाधिकारी टिहरी की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। समिति को संबंधित अभिलेखों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

मूल्यागांव बंजी जंपिंग स्थल भी हो चुका है सील

जिला प्रशासन ने इससे पहले गुरुवार को कीर्तिनगर क्षेत्र के मूल्यागांव में संचालित मां गंगा बंजी जंपिंग स्थल को सुरक्षा मानकों में कमी और राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की पार्किंग की समस्या के चलते सील किया था। निरीक्षण के दौरान वहां आपातकालीन चिकित्सा उपकरण उपलब्ध नहीं मिले थे। पार्किंग की उचित व्यवस्था न होने के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहन खड़े किए जा रहे थे।

लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि जिला प्रशासन पर्यटन गतिविधियों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सख्त रुख अपना रहा है।

पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता: डीएम

जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने कहा कि पर्यटकों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पर्यटन से जुड़ी किसी भी गतिविधि में सुरक्षा मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी संबंधित अधिकारियों और संचालकों को निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा, ताकि पर्यटकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

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