राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: ढालवाला में 50 महिला बुनकरों को मिला हुनर को कारोबार में बदलने का मंत्र
नाबार्ड के एक दिवसीय कार्यक्रम में नई तकनीक, डिजाइन, बैंकिंग सुविधाओं और सरकारी योजनाओं की दी जानकारी; चार महिला समूहों ने लगाई उत्पाद प्रदर्शनी

ढालवाला। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर नाबार्ड के सहयोग से भारतीय ग्रामोत्थान संस्था, ढालवाला की ओर से एक दिवसीय जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बुनकरी और हस्तशिल्प से जुड़ी करीब 50 ग्रामीण महिलाओं ने प्रतिभाग किया। विशेषज्ञों ने महिला बुनकरों को आधुनिक तकनीक, नए डिजाइन, बैंकिंग सुविधाओं, सरकारी योजनाओं, बाजार की मांग और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी देकर उनके पारंपरिक हुनर को उद्यम का रूप देने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता नाबार्ड के डीडीएम टिहरी गढ़वाल ए.एन. शुक्ला ने की। जिला उद्योग केंद्र नरेंद्रनगर के महाप्रबंधक एम.एस. सिवाण बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। इसके अलावा UHHDC की सहायक निदेशक माधवी भट्ट, हैंडलूम डिजाइनर आयुषी गुप्ता, इंडियन ओवरसीज बैंक के सहायक प्रबंधक सुधांशु डिमरी, भारतीय ग्रामोत्थान संस्था की अध्यक्ष गीता चंदोला और संस्था के प्रभारी अनिल चंदोला सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
हुनर को कारोबार से जोड़ने पर जोर
कार्यक्रम में नाबार्ड के डीडीएम ए.एन. शुक्ला ने ग्रामीण महिलाओं के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं, वित्तीय सहायता और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपने पारंपरिक हुनर को आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम बनाने का आह्वान किया।
जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक एम.एस. सिवाण ने उद्योग विभाग की योजनाओं और उद्यमिता के अवसरों की जानकारी साझा करते हुए कहा कि महिलाओं के पास मौजूद हुनर को व्यवसाय से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है।
UHHDC की सहायक निदेशक माधवी भट्ट ने उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार की बदलती जरूरतों के अनुरूप काम करने की जानकारी दी। वहीं हैंडलूम डिजाइनर आयुषी गुप्ता ने नए डिजाइन, रंगों के बेहतर संयोजन, उत्पाद विविधीकरण और बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद तैयार करने के उपयोगी सुझाव दिए।
बैंकिंग और ऋण सुविधाओं की दी जानकारी
इंडियन ओवरसीज बैंक के सहायक प्रबंधक सुधांशु डिमरी ने महिला बुनकरों को बैंकिंग सेवाओं, ऋण सुविधाओं और वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने महिलाओं से बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठाकर अपने कारोबार को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की अपील की।
भारतीय ग्रामोत्थान संस्था की अध्यक्ष गीता चंदोला ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं के पारंपरिक हुनर को नई तकनीक और बाजार की जरूरतों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।
संस्था के प्रभारी अनिल चंदोला ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम महिला बुनकरों को उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने, नई तकनीक और डिजाइन सीखने तथा बाजार से सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। स्थानीय स्तर पर तैयार हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों को उचित मंच और बाजार उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास जरूरी हैं।
चार महिला समूहों ने लगाई उत्पाद प्रदर्शनी
कार्यक्रम के दौरान चार महिला समूहों की ओर से हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में महिलाओं द्वारा तैयार विभिन्न उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर महिला बुनकरों के हुनर और प्रयासों की सराहना की।
इस दौरान महिला बुनकरों ने अपने अनुभव साझा करने के साथ ही कामकाज से जुड़ी समस्याएं भी विशेषज्ञों के सामने रखीं। विशेषज्ञों ने उनके सवालों का समाधान करते हुए उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने, नए डिजाइन अपनाने और बाजार से बेहतर जुड़ाव के लिए आवश्यक सुझाव दिए।
उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिला बुनकर सम्मानित
कार्यक्रम के समापन पर बुनकरी एवं हस्तशिल्प के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिला बुनकरों को सम्मानित किया गया। अतिथियों ने सम्मानित महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनका हुनर न केवल उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि उत्तराखंड की पारंपरिक कला, संस्कृति और हथकरघा विरासत को भी आगे बढ़ा रहा है।
वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड के हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों को आधुनिक डिजाइन, बेहतर पैकेजिंग, उत्पाद विविधीकरण और मजबूत बाजार से जोड़ा जाए तो ग्रामीण महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। ऐसे प्रशिक्षण और संवाद कार्यक्रम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ प्रदेश की पारंपरिक कला एवं संस्कृति के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।



