अस्पताल जाने वाली सड़क बनी मुसीबत, गड्ढों और कीचड़ में हिचकोले खा रही 108 एंबुलेंस
थत्यूड़ सीएचसी ढाणा मार्ग की बदहाली से मरीज, गर्भवती महिलाएं, स्कूली बच्चे और कर्मचारी परेशान; 94 लाख का प्रस्ताव शासन में लंबित, ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी।

रिपोर्ट –मुकेश रावत
थत्यूड़ (टिहरी गढ़वाल)। विकासखंड मुख्यालय थत्यूड़ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ढाणा को जोड़ने वाला मुख्य मोटर मार्ग लंबे समय से बदहाल स्थिति में है। सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढे, कीचड़ और जलभराव ने आम लोगों का सफर मुश्किल ही नहीं, बल्कि खतरनाक भी बना दिया है। सबसे अधिक परेशानी अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों, गर्भवती महिलाओं, स्कूली बच्चों और रोजाना आवागमन करने वाले कर्मचारियों को झेलनी पड़ रही है।
बरसात के मौसम में हालात और गंभीर हो जाते हैं। गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क तालाब जैसी नजर आती है। स्कूली बच्चों के कपड़े रोजाना कीचड़ से सन जाते हैं, जबकि दोपहिया वाहन चालकों के लिए फिसलन और दुर्घटना का खतरा बना रहता है। गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने वाली 108 एंबुलेंस भी गहरे गड्ढों से गुजरते हुए हिचकोले खाने को मजबूर है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क किनारे नालियों का निर्माण नहीं होने के कारण बरसाती पानी सीधे सड़क पर बहता है। इससे डामर पूरी तरह उखड़ चुका है और सड़क लगातार क्षतिग्रस्त होती जा रही है।
जिला पंचायत सदस्य सबिता देवी ने बताया कि सड़क के सुधारीकरण और डामरीकरण के लिए स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। जौनपुर क्षेत्र पंचायत की बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।
ब्रह्मसारी ग्राम प्रधान सरस्वती रावत ने कहा कि यह बाजार क्षेत्र की मुख्य सड़क है, जिससे अस्पताल, स्कूल, सरकारी व अर्द्धसरकारी कार्यालयों के कर्मचारी और सैकड़ों ग्रामीण प्रतिदिन गुजरते हैं। सड़क की जर्जर हालत लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गई है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने शासन-प्रशासन से सड़क का शीघ्र सुधारीकरण और डामरीकरण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया तो संबंधित विभाग के खिलाफ उग्र आंदोलन किया जाएगा।
क्या बोले विभागीय अधिकारी?
लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता नवीन शर्मा ने बताया कि पहले सड़क पर इंटरलॉक टाइल्स लगाने का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे स्वीकृति नहीं मिली। अब करीब 94 लाख रुपये का नया प्राक्कलन शासन को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
जनता का सवाल
जब अस्पताल, स्कूल और सरकारी संस्थानों तक पहुंचने का यही मुख्य मार्ग है, तो इसके सुधारीकरण में आखिर इतनी देरी क्यों? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदार विभाग जागेगा?



