नई टिहरी में लगा ‘न्याय का महाकुंभ’, हाईकोर्ट के न्यायमूर्तियों ने कहा— अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा न्याय
बहुउद्देशीय विधिक सेवा शिविर में उमड़ा जनसैलाब, मुफ्त कानूनी सलाह से लेकर स्वास्थ्य जांच और प्रमाण पत्र तक मिलीं सेवाएं

नई टिहरी: “न्याय सबके लिए” के संकल्प के साथ रविवार को नई टिहरी नगर पालिका परिषद सभागार में बहुउद्देशीय विधिक सेवा एवं जागरूकता शिविर का भव्य आयोजन किया गया। शिविर में उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्तियों ने आमजन को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय नैनीताल के न्यायाधीश एवं उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी मौजूद रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में न्यायमूर्ति आलोक माहरा ने सहभागिता की। कार्यक्रम में प्रभारी जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे भी उपस्थित रहीं।
‘जागरूकता ही सबसे बड़ी ताकत’
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी ने कहा कि आर्थिक या सामाजिक रूप से कमजोर व्यक्ति भी न्याय से वंचित न रहे, यही इस शिविर का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद, मजदूरी और सामाजिक उत्पीड़न जैसे मामलों में भी निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
उन्होंने कहा कि टिहरी की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां संघर्ष और सहयोग की प्रेरणा देती हैं तथा जागरूक नागरिक ही मजबूत समाज का निर्माण करते हैं।
हर व्यक्ति तक पहुंचे विधिक सहायता
न्यायमूर्ति आलोक माहरा ने कहा कि विधिक साक्षरता शिविर आमजन को उनके मौलिक और वैधानिक अधिकारों की जानकारी देने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जरूरत पड़ने पर बिना झिझक कानूनी सहायता लें और समाज में भी विधिक जागरूकता फैलाएं।
‘न्याय सबके लिए’ का संदेश
जिला जज नितिन शर्मा ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में कई लोग कानूनी सेवाओं से अब तक पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं, इसलिए इस प्रकार के शिविर बेहद जरूरी हैं। उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के उद्देश्य “Access to Justice” पर विस्तार से प्रकाश डाला।
विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव दयाराम ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 39(क) के तहत हर व्यक्ति को न्याय दिलाने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ गांवों तक विधिक सहायता पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
2780 गांव बने मुकदमा मुक्त
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव प्रदीप कुमार मणी ने बताया कि उत्तराखण्ड में लगभग 16 हजार ‘अधिकार मित्र’ और पैनल अधिवक्ताओं की टीमें कार्य कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 2780 गांवों को ‘मुकदमा मुक्त’ बनाया जा चुका है। साथ ही न्यायमित्र हेल्पलाइन 18001804000 के जरिए लोगों को मुफ्त कानूनी सलाह दी जा रही है।
एक ही मंच पर मिली कई सुविधाएं
शिविर में राजस्व, कृषि, उद्यान, पशुपालन, स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण, पुलिस और सैनिक कल्याण विभाग समेत कई विभागों ने स्टॉल लगाकर लोगों की समस्याओं का मौके पर समाधान किया।
आय, जाति, दिव्यांग और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए गए, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने मुफ्त जांच और दवा वितरण किया।
गढ़वाली संस्कृति ने बांधा समां
कार्यक्रम में छात्राओं ने सरस्वती वंदना, गढ़वाली डोली नृत्य, लोकनृत्य और नशा मुक्ति पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी।
मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया, जबकि स्वयं सहायता समूहों को तीन लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई।



