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भारी ओलावृष्टि से तबाह हुई किसानों की उम्मीदें, नकदी फसलें और बागवानी पूरी तरह बर्बाद

रौतू की बेली, फेडी-किमोड़ा और ब्रहमसारी गांवों में कहर, किसानों ने मांगा तत्काल मुआवजा और राहत पैकेज

रिपोर्ट –मुकेश रावत 

थत्यूड़। धनोल्टी विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत रौतू की बेली, फेडी-किमोड़ा और ब्रहमसारी में सोमवार शाम मौसम ने ऐसा कहर बरपाया कि कुछ ही मिनटों में किसानों की महीनों की मेहनत मिट्टी में मिल गई। तेज बारिश के साथ हुई भीषण ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी नकदी फसलों, सब्जियों और फलदार बागानों को पूरी तरह तबाह कर दिया। खेतों में सफेद चादर की तरह बिछे ओले किसानों के टूटे अरमानों की कहानी बयां कर रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार इस बार किसानों ने भारी उम्मीदों के साथ खेती और बागवानी में निवेश किया था, लेकिन प्रकृति की इस मार ने उनकी कमर तोड़ दी। बड़े-बड़े ओलों की मार से तैयार फसलें खेतों में बिछ गईं, जबकि सेब, नाशपाती और अन्य फलदार पौधों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कई किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी और अब उनके सामने परिवार का पालन-पोषण करना भी बड़ी चुनौती बन गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अप्रैल माह में भी क्षेत्र में ओलावृष्टि हुई थी, लेकिन इस बार नुकसान कहीं ज्यादा भयावह है। किसानों का आरोप है कि हर बार प्राकृतिक आपदा के बाद सिर्फ आश्वासन मिलते हैं, लेकिन जमीन पर राहत नहीं पहुंचती।

क्षेत्र पंचायत सदस्य रमेश विष्ट और ग्राम प्रधान पूजा पंवार ने प्रशासन से तुरंत प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर नुकसान का आकलन कराने और किसानों को तत्काल राहत राशि देने की मांग की है। जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द मदद नहीं मिली तो किसानों की आर्थिक स्थिति गंभीर संकट में पहुंच जाएगी।

ग्रामीणों ने सरकार और उद्यान/कृषि विभाग से मांग की है कि फसल बीमा योजना को धरातल पर प्रभावी बनाया जाए और पहाड़ी क्षेत्रों में बार-बार हो रही प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए स्थायी नीति तैयार की जाए।

ओलावृष्टि के बाद पूरे इलाके में मायूसी और चिंता का माहौल है। किसान अब प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं कि आखिर उनकी सुध कब ली जाएगी।

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