पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू से महका ललोटना का विद्यालय, गढ़भोज में दिखी पहाड़ की समृद्ध खान-पान संस्कृति
पारंपरिक व्यंजन प्रतियोगिता में अभिभावक माताओं ने दिखाई प्रतिभा, बच्चों को अपनी जड़ों और पौष्टिक भोजन से जोड़ने का दिया संदेश

थत्यूड़ 06 अक्टूबर। राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय ललोटना में मंगलवार को स्थानीय पारंपरिक खाद्य संस्कृति और पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गढ़भोज कार्यक्रम एवं पारंपरिक व्यंजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय परिवार के साथ अभिभावकों और स्थानीय समुदाय ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। विभिन्न पहाड़ी व्यंजनों की खुशबू से विद्यालय परिसर महक उठा।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पारंपरिक खाद्य पदार्थों एवं पहाड़ी व्यंजनों को बढ़ावा देने के साथ नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध खान-पान की परंपरा से परिचित कराना रहा। प्रतियोगिता में अभिभावक माताओं ने स्थानीय एवं पारंपरिक सामग्री से तैयार विभिन्न स्वादिष्ट और पौष्टिक व्यंजन प्रस्तुत किए। व्यंजनों की विविधता और आकर्षक प्रस्तुतीकरण ने सभी का ध्यान खींचा।
प्रतियोगिता में व्यंजनों की पारंपरिकता, पौष्टिकता, स्वाद, प्रस्तुतीकरण, स्थानीय सामग्री के उपयोग और स्वच्छता सहित विभिन्न मानकों के आधार पर निर्णायकों ने मूल्यांकन किया। निर्णायकों ने निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ प्रतियोगिता का निर्णय किया।
स्थानीय संस्कृति को जीवंत रखने में गढ़भोज की अहम भूमिका
ग्राम प्रधान रिजमोहन रांगड़ ने कहा कि गढ़भोज जैसे आयोजन स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पारंपरिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने से बच्चों को अपनी जड़ों से जुड़ने के साथ पौष्टिक भोजन के महत्व को समझने का अवसर मिलता है।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक मनवीर सिंह ने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों को स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता के लिए आभार जताया।
एसएमसी अध्यक्ष शर्मिला देवी ने भी कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि विद्यालय, अभिभावक और समुदाय मिलकर बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ स्थानीय संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
गढ़भोज बना शैक्षिक गोष्ठी का मंच
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने नौनिहालों की शैक्षिक प्रगति और सर्वांगीण विकास पर भी चर्चा की। शिक्षकों ने अभिभावकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए कहा कि बच्चों की शैक्षिक प्रगति और विद्यालय के विकास में समुदाय की सहभागिता बेहद महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। पारंपरिक व्यंजनों के माध्यम से उत्तराखंड के जौनपुर विकासखंड की समृद्ध खान-पान शैली और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली।
आयोजन ने बच्चों, अभिभावकों और विद्यालय परिवार को एक मंच पर जोड़ते हुए स्थानीय भोजन अपनाने, स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने और पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया।
विद्यालय परिवार ने प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले सभी अभिभावकों, निर्णायकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।



