ख्यार्सी में आस्था का सैलाब, धूमधाम से संपन्न हुआ महासू देवता का जागड़ा पर्व
ढोल-दमाऊ, रणसिंगा और भंकोरे की गूंज से गुंजायमान रहा ख्यार्सी गांव, हारुल-रासो और तांदी पर रातभर झूमे श्रद्धालु

रिपोर्ट–मुकेश रावत
थत्यूड, टिहरी। जौनपुर क्षेत्र के ख्यार्सी गांव में महासू देवता का पावन जागड़ा पर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ धूमधाम से संपन्न हुआ। इस दौरान ढोल-दमाऊ, रणसिंगा और भंकोरे की पारंपरिक धुनों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा। महासू देवता के जयकारों के बीच स्थानीय ग्रामीणों के साथ दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की।
जागड़ा पर्व के अवसर पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार महासू देवता की विशेष पूजा-अर्चना की गई। रात्रि जागरण के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। लोक संस्कृति की झलक उस समय देखने को मिली, जब ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने ढोल-दमाऊ की थाप पर हारुल, रासो और तांदी जैसे पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए।
देव-गाथाओं और पवाड़ों के गायन के बीच श्रद्धालु देर रात तक भक्ति में लीन रहे। पूरे गांव में धार्मिक आस्था के साथ उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला।
गणमान्य लोगों ने की शिरकत
जागड़ा पर्व में क्षेत्र के विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अतिथियों ने भी भाग लिया। उन्होंने महासू देवता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। ग्रामवासियों और आयोजन समिति की ओर से कार्यक्रम में पहुंचे अतिथियों का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत और सम्मान किया गया।
आयोजन समिति ने जताया आभार
जागड़ा पर्व के सफल आयोजन पर ग्रामवासियों और आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं, अतिथियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। समिति ने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था, सहभागिता और सहयोग से ही इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन को भव्य स्वरूप मिला। इस अवसर पर महासू देवता से क्षेत्र में सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की प्रार्थना की गई।



