महिलाओं की सुरक्षा और बच्चों की हिफाजत को लेकर जागरूकता कार्यशाला
ढाणा में POSH और पोक्सो अधिनियम पर दिया प्रशिक्षण, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता से कार्य करने का आह्वान

थत्यूड़। लण्डौर कम्युनिटी अस्पताल मसूरी के सौजन्य से सोमवार को दिव्यांग रिसोर्स सेंटर (डीआरसी) ढाणा में महिलाओं की कार्यस्थल पर सुरक्षा एवं उत्पीड़न की रोकथाम अधिनियम-2013 (POSH) और बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम-2012 (पोक्सो) को लेकर एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला में संवेदना टीम, अजीम प्रेमजी एमसीएच फाउंडेशन, एनिमल केयर प्रोजेक्ट, मानसिक स्वास्थ्य प्रोजेक्ट, करुणा प्रोजेक्ट और एडम मेमोरियल प्रोजेक्ट से जुड़े स्टाफ एवं एनिमेटरों ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं की कार्यस्थल पर सुरक्षा, यौन उत्पीड़न की रोकथाम और शिकायतों के निस्तारण से जुड़े कानूनी प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण में डॉ. बिनु थॉमस और डॉ. पवित्रा ने प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि पोक्सो अधिनियम 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को लैंगिक अपराध और यौन शोषण से सुरक्षा प्रदान करता है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
प्रशिक्षकों ने बताया कि पोक्सो कानून के तहत पीड़ित बच्चे की पहचान और उसकी गोपनीयता की रक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। बच्चों को घर, स्कूल और समाज में सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सभी की जिम्मेदारी है।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता, सजगता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का आह्वान किया गया। साथ ही किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या लैंगिक अपराध की स्थिति में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।



