टिहरी में कामकाजी माताओं का सहारा बना ‘पालना’, नौनिहालों की जिम्मेदारी संभाल रहे क्रेच
जिले में संचालित हो रहे 15 क्रेच आंगनवाड़ी केंद्र, 7 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों को मिल रही सुरक्षित देखभाल, पोषण और सीखने का माहौल

टिहरी, 06 सितंबर। मां के लिए अपने बच्चे से बढ़कर कुछ नहीं होता। लेकिन परिवार की जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए जब उसे रोजगार या मजदूरी के लिए घर से बाहर निकलना पड़ता है, तो सबसे बड़ी चिंता छोटे बच्चे की देखभाल को लेकर रहती है। टिहरी जनपद में क्रेच आंगनवाड़ी ‘पालना’ ऐसी ही कामकाजी और श्रमिक माताओं के लिए भरोसे का सहारा बनकर सामने आया है। अब माताएं अपने नौनिहालों को सुरक्षित हाथों में छोड़कर बेफिक्र होकर रोजगार और आजीविका से जुड़े कार्य कर पा रही हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल को धरातल पर उतारते हुए जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल के निर्देश पर बाल विकास विभाग की ओर से जनपद में 15 क्रेच आंगनवाड़ी ‘पालना’ केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से छोटे बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उनकी माताओं को रोजगार से जुड़े रहने का अवसर मिल रहा है। भविष्य में इन केंद्रों की संख्या बढ़ाने की भी योजना है, जिससे अधिक से अधिक कामकाजी महिलाओं और बच्चों को इसका लाभ मिल सके।
पोषण के साथ खेल-खेल में सीख रहे नौनिहाल
क्रेच ‘पालना’ केंद्रों में 7 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों की देखभाल की जाती है। यहां बच्चों की उम्र के अनुसार पौष्टिक आहार, स्वच्छता, आराम और सुरक्षित वातावरण का विशेष ध्यान रखा जाता है। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए खेल-खेल में सीखने की गतिविधियां कराई जाती हैं। कहानी-कविता, चित्र पहचान, खिलौनों के माध्यम से गतिविधियां और आपसी बातचीत के जरिए बच्चों को सीखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। साथ ही उनके स्वास्थ्य और पोषण की नियमित निगरानी भी की जाती है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास संजय गौरव ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर जनपद में 15 क्रेच केंद्र शुरू किए गए हैं। इनका मुख्य उद्देश्य कामकाजी और श्रमिक महिलाओं को छोटे बच्चों की सुरक्षित देखभाल की सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि वे बिना किसी चिंता के अपने रोजगार और आजीविका से जुड़ी रह सकें। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में क्रेच केंद्रों की संख्या बढ़ाकर अधिक से अधिक महिलाओं और बच्चों को लाभान्वित करने का प्रयास किया जाएगा।
बच्चों की मुस्कान बढ़ा रही माताओं का भरोसा
ढूंगीधार क्रेच की कार्यकत्री साजिया खान के अनुसार छोटे बच्चों की देखभाल में केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि अपनापन और खुशहाल वातावरण भी जरूरी है। केंद्र में बच्चों की उम्र और रुचि के अनुसार खेल व गतिविधियां कराई जाती हैं। भोजन, स्वच्छता और आराम का विशेष ध्यान रखा जाता है। उन्होंने बताया कि जब माताएं अपने बच्चों को सुरक्षित और खुश देखती हैं तो उनका भरोसा भी बढ़ता है।
‘पालना’ का उद्देश्य यही है कि मां निश्चिंत होकर काम करे और बच्चा सुरक्षित, स्वस्थ एवं स्नेहपूर्ण वातावरण में रहे।
माताओं को मिला आत्मनिर्भरता का अवसर
‘पालना’ केंद्रों ने जहां कामकाजी माताओं की बच्चों को लेकर चिंता कम की है, वहीं उन्हें रोजगार और आजीविका से जुड़े रहने का अवसर भी दिया है। मां जब काम के लिए घर से बाहर निकलती है, तो बच्चे की सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी ‘पालना’ संभाल रहा है। इस पहल से नौनिहालों को पोषण, सुरक्षा और सीखने का बेहतर वातावरण मिल रहा है, जबकि माताओं के लिए आत्मनिर्भर बनने और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में योगदान देने की राह आसान हो रही है।



