ग्रामोत्थान परियोजना से बदली भैंसकोटी की महिलाओं की जिंदगी, बेकरी उद्यम ने खोले आत्मनिर्भरता के नए द्वार
10 लाख रुपये की लागत से शुरू हुआ बेकरी कारोबार, मंडुवा बिस्किट से लेकर ब्रेड और केक तक की बाजार में बढ़ी मांग; हर माह 50 से 60 हजार रुपये का कारोबार, 30 से 40 हजार तक शुद्ध लाभ

टिहरी। ग्रामोत्थान परियोजना ने थौलधार विकासखंड के ग्राम भैंसकोटी की महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद जगा दी है। कभी घरेलू कामकाज और खेती-किसानी तक सीमित रहने वाली गांव की महिलाएं अब अपने हुनर और मेहनत के दम पर सफल उद्यमी बनकर पहचान बना रही हैं। बेकरी उद्यम के जरिए महिलाओं ने न केवल रोजगार का नया रास्ता तैयार किया है, बल्कि स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देने का काम किया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और आजीविका से जोड़ने के लिए चलाए जा रहे प्रयासों का असर भैंसकोटी गांव में साफ दिखाई दे रहा है। राजेश्वरी सकलानी, गीता भट्ट, आशा देवी, रजनी, अनीता, विशिला देवी और शकुन्तला देवी ने एकजुट होकर बेकरी उद्यम की शुरुआत की और आज सफलता की मिसाल बन रही हैं।
दिव्य ग्राम संगठन से जुड़ी इन महिलाओं ने शिवालय, संतोषी और लक्ष्मी स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से जनवरी 2026 में ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से बेकरी कारोबार शुरू किया। उद्यम स्थापित करने के लिए परियोजना से 6 लाख रुपये की सहायता, 3 लाख रुपये का बैंक ऋण और 1 लाख रुपये का स्वयं का अंशदान, यानी कुल 10 लाख रुपये की लागत से मशीनें और आवश्यक उपकरण खरीदे गए।
महिलाओं की मेहनत का नतीजा अब बाजार में भी दिखाई देने लगा है। बेकरी में मंडुवा बिस्किट, आटा बिस्किट, मशरूम बिस्किट, फैन, बन, ब्रेड और केक तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों की थौलधार, कमांद, कांडीखाल और टिहरी के बाजारों में मांग के अनुसार बिक्री की जा रही है।
महिलाओं के अनुसार उद्यम से प्रतिमाह करीब 50 से 60 हजार रुपये की आय हो रही है, जिसमें लगभग 30 से 40 हजार रुपये तक शुद्ध लाभ अर्जित किया जा रहा है। इससे महिलाओं के आत्मविश्वास में भी बड़ा इजाफा हुआ है और अब वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।
राजेश्वरी सकलानी समेत अन्य महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जिला प्रशासन और ग्रामोत्थान परियोजना का आभार जताते हुए कहा कि सरकारी सहयोग ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया। महिलाओं का कहना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को इसी तरह प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो वे अपने गांव में ही रोजगार के बेहतर अवसर पैदा कर सकती हैं।
प्रभारी परियोजना निदेशक, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण ज्योति ने बताया कि ग्रामोत्थान परियोजना का उद्देश्य महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को उनकी क्षमता तथा स्थानीय संसाधनों के अनुरूप स्वरोजगार से जोड़ना है। भैंसकोटी की महिलाओं का बेकरी उद्यम इसी दिशा में एक प्रेरक उदाहरण है।
भैंसकोटी की इन महिलाओं की कहानी यह साबित करती है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ, महिलाओं की मेहनत और सामूहिक प्रयास मिल जाए तो पहाड़ के गांवों में भी रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिखी जा सकती है।



