मंच पर भावुक हुईं रेशमा शाह! विजेंद्र पंवार के लिए जो कहा, सुनकर आपका भी दिल छू जाएगा
बंगशील की रामलीला में अपने संघर्ष के दिन याद कर छलका लोकगायिका का दर्द, बोलीं—मुश्किल समय में आपने मेरा साथ दिया, इसे कभी नहीं भूल सकती

रिपोर्ट: मुकेश रावत
थत्यूड़। कहते हैं कि किसी इंसान की असली पहचान उसके पद, प्रतिष्ठा और दौलत से नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में दूसरों के साथ खड़े होने से होती है। जब किसी प्रतिभा को अवसर नहीं मिलता, तब उसे प्रोत्साहित करने वाला एक व्यक्ति भी उसके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। टिहरी गढ़वाल के जौनपुर विकासखंड के बंगशील में आयोजित रामलीला के मंच पर कुछ ऐसा ही भावुक प्रसंग देखने को मिला।
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आदर्श रामलीला समिति बंगशील देवलसारी की ओर से आयोजित 11 वें दिन की रामलीला में उत्तराखंड की सुप्रसिद्ध लोकगायिका रेशमा शाह ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए समिति के अध्यक्ष एवं पत्रकार विजेंद्र पंवार के प्रति आभार व्यक्त किया। मंच से उनके शब्दों में झलकता सम्मान और अपनापन कार्यक्रम का भावुक क्षण बन गया।
मंच से बोलीं रेशमा शाह—पंवार जी के लिए मेरे पास शब्द नहीं
लोकगायिका रेशमा शाह ने विजेंद्र पंवार की सराहना करते हुए उपस्थित लोगों से उनके लिए जोरदार तालियां बजाने का आग्रह किया। उन्होंने पंवार जी को बड़े भाई के समान बताते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।
रेशमा शाह ने अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों को याद किया और बताया कि एक समय उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए मंच और अवसर की तलाश करनी पड़ती थी। उन्होंने मसूरी में बिताए संघर्ष के दिनों का जिक्र करते हुए बताया कि उस दौर में उन्हें भी अपनी गायिकी के लिए पहचान बनाने की चुनौती का सामना करना पड़ा।
उनके अनुसार, ऐसे समय में विजेंद्र पंवार ने उनका हौसला बढ़ाया और उनकी प्रतिभा को सामने लाने में सहयोग किया। रेशमा शाह ने उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि संघर्ष के दिनों में मिले सहयोग को वह आज भी याद रखती हैं।
संघर्ष के दिनों का साथ आज भी याद
रेशमा शाह ने भावुक होकर बताया कि वह एक साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से आती हैं और उनके लिए आगे बढ़ने का सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने कहा कि जब वह संघर्ष कर रही थीं, तब विजेंद्र पंवार ने उनका साथ दिया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने अपने भाई के सम्मान में मां की चुनरी लाने का भी उल्लेख किया। यह उनके लिए केवल एक भेंट नहीं, बल्कि स्नेह, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम था।
इस प्रसंग ने वहां मौजूद लोगों को यह संदेश दिया कि किसी व्यक्ति को उसके कठिन समय में दिया गया प्रोत्साहन और सहयोग लंबे समय तक याद रहता है।
मां भगवती से की परिवार और क्षेत्र की खुशहाली की कामना
रेशमा शाह ने मां भगवती से विजेंद्र पंवार के लिए आशीर्वाद मांगा। साथ ही बंगशील और पूरे पालिगाड़ क्षेत्र पर भगवान नागराज की कृपा बने रहने की कामना की।
रामलीला का यह मंच धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं के साथ एक आत्मीय रिश्ते की अभिव्यक्ति का भी साक्षी बना। रेशमा शाह द्वारा व्यक्त किया गया सम्मान इस बात की याद दिलाता है कि सफलता के सफर में सहयोग देने वाले लोगों को याद रखना भी जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों में शामिल है।
पत्रकारिता का दायित्व प्रतिभाओं को पहचान दिलाना भी
इस प्रसंग से पत्रकारिता और सामाजिक जिम्मेदारी के संबंध में भी एक महत्वपूर्ण संदेश सामने आता है। पत्रकारिता का काम केवल घटनाओं और विवादों को सामने लाना ही नहीं, बल्कि समाज की सकारात्मक कहानियों, संघर्षशील प्रतिभाओं और प्रेरणादायक प्रयासों को भी पाठकों तक पहुंचाना है।
किसी प्रतिभाशाली व्यक्ति को अवसर दिलाने में सहयोग करना, उसके काम को समाज के सामने लाना और उसकी उपलब्धियों को उचित स्थान देना सकारात्मक सामाजिक योगदान हो सकता है। हालांकि, पत्रकारिता में प्रशंसा हो या आलोचना, उसका आधार तथ्य, निष्पक्षता और जनहित होना चाहिए।
किसी की प्रतिभा को पहचान देना और संघर्ष के समय उसका हौसला बढ़ाना समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान है।
समाज के लिए संदेश—संघर्ष करने वालों का हौसला बढ़ाएं
आज अनेक युवा और कलाकार संसाधनों की कमी तथा अवसरों के अभाव के कारण अपनी प्रतिभा को सामने लाने के लिए संघर्ष करते हैं। ऐसे में समाज की जिम्मेदारी है कि वह उनकी क्षमता को पहचाने और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करे।
बंगशील की रामलीला में रेशमा शाह द्वारा विजेंद्र पंवार के प्रति व्यक्त किया गया सम्मान इसी भावना को रेखांकित करता है। यह प्रसंग याद दिलाता है कि इंसान की वास्तविक पहचान केवल उसकी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में किए गए सकारात्मक योगदान से भी बनती है।
सफलता मिलने के बाद उन लोगों को याद रखना, जिन्होंने मुश्किल समय में हौसला बढ़ाया हो, अपने आप में एक बड़ी खूबी है। यही भाव इस आयोजन के सबसे उल्लेखनीय प्रसंगों में से एक रहा।



