टिहरी में पशुपालन बना स्वरोजगार का मजबूत आधार, पांच साल में लाभार्थियों को मिली 10.35 करोड़ की आर्थिक सहायता
गौपालन, बकरी-भेड़ पालन, ब्रॉयलर फार्म और गोट वैली योजनाओं से ग्रामीणों को जोड़ा; युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर

टिहरी। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को स्वरोजगार और आय का मजबूत जरिया बनाने की दिशा में पशुपालन विभाग की विभिन्न योजनाएं ग्रामीण परिवारों के लिए सहायक साबित हो रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संकल्प के तहत जनपद में संचालित योजनाओं के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक पात्र लाभार्थियों को कुल 10 करोड़ 35 लाख 23 हजार 141 रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है।
पशुपालन विभाग की योजनाओं के तहत ग्रामीणों को गौपालन, बकरी पालन, भेड़ पालन, महिला बकरी पालन, ब्रॉयलर फार्म और गोट वैली जैसी गतिविधियों से जोड़कर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। विभाग का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डीके शर्मा ने बताया कि विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को पशुधन इकाइयां स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है। इसके साथ ही लाभार्थियों को पशुओं की देखभाल, प्रबंधन और इकाई संचालन से संबंधित आवश्यक जानकारी भी उपलब्ध कराई जाती है।
उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में एससीपी गौपालन योजना के तहत 412 लाभार्थियों को करीब 1.48 करोड़ रुपये, जबकि टीएसपी गौपालन योजना के तहत 41 पशुपालकों को 14.76 लाख रुपये की सहायता दी गई। वहीं सामान्य वर्ग बकरी पालन योजना में 157 लाभार्थियों को 98.91 लाख रुपये, एससीपी बकरी पालन योजना में 278 लाभार्थियों को 1.75 करोड़ रुपये और टीएसपी बकरी पालन योजना में 23 लाभार्थियों को 14.49 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।
इसी तरह एससीपी भेड़ पालन योजना के तहत 166 लाभार्थियों को 1.04 करोड़ रुपये तथा टीएसपी भेड़ पालन योजना में 17 लाभार्थियों को 10.71 लाख रुपये की सहायता दी गई। महिला बकरी पालन योजना के तहत 200 लाभार्थियों को 70 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई।
विभाग की मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन योजना के तहत 308 लाभार्थियों को करीब 34.21 लाख रुपये, ब्रॉयलर फार्म योजना में 440 लाभार्थियों को 1.56 करोड़ रुपये तथा गोट वैली योजना के तहत 437 लाभार्थियों को करीब 2.08 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी गई।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। दूध, मांस और अंडा उत्पादन जैसी गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को नियमित आय का अवसर मिल रहा है। विभाग की ओर से युवाओं, महिलाओं और अन्य पात्र परिवारों को योजनाओं से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पशुपालन के माध्यम से ग्रामीणों की आय बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विभाग का विशेष जोर है।



