वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूरे: राष्ट्रभक्ति का अमर मंत्र गूंजा रौतू की बेली में
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत बोले — ‘वन्दे मातरम्’ केवल गीत नहीं, भारत माता के प्रति श्रद्धा और एकता का संकल्प है

थत्यूड़/टिहरी। भारत माता के जयगान ‘वन्दे मातरम्’ की गूंज रविवार को रौतू की बेली में स्थित राजकीय इंटर कॉलेज परिसर में सुनाई दी, जब इस अमर गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में “वन्दे मातरम् स्मरणोत्सव” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि “वन्दे मातरम् कोई सामान्य गीत नहीं, बल्कि यह राष्ट्रभक्ति की भावना को प्रज्वलित करने वाला पवित्र संकल्प है, जो हमें सशक्त और समृद्ध भारत के निर्माण की प्रेरणा देता रहेगा।”
उन्होंने कहा कि बंकिमचंद्र चटर्जी ने इस गीत को अपने प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंद मठ’ में सन 1770 के संन्यासी विद्रोह की पृष्ठभूमि पर लिखा था। यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के समय लाखों सेनानियों की प्रेरणा बना। “स्वाधीनता संग्राम के दौरान जब वीर रणभूमि में शहीद होते थे तो उनके मुख से निकलने वाले अंतिम शब्द ‘वन्दे मातरम्’ ही होते थे,” डॉ. रावत ने कहा।
हर विद्यालय में गूंजे वन्दे मातरम् — शिक्षा मंत्री
शिक्षा मंत्री ने कहा कि आज जब यह गीत अपने 150 गौरवशाली वर्ष पूरे कर रहा है, तब हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह इस राष्ट्रगीत के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करे। उन्होंने कहा कि यह तभी संभव होगा जब प्रत्येक विद्यालय में प्रतिदिन ‘वन्दे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया जाए और बच्चों को राष्ट्रीय एकता, भावनात्मक समरसता और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया जाए।
उन्होंने बताया कि स्मरणोत्सव के तहत प्रदेशभर के विद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, निबंध, भाषण, समूह गायन और चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
छात्रों संग संवाद, विद्यालयों का निरीक्षण भी किया
कार्यक्रम के दौरान ‘वन्दे मातरम्’ के सामूहिक गायन ने पूरा वातावरण देशभक्ति से सराबोर कर दिया। इसके उपरांत डॉ. रावत ने छात्र-छात्राओं और शिक्षकों से संवाद कर विद्यालय की शिक्षण व्यवस्था, सुविधाओं और गुणवत्ता की जानकारी ली। उन्होंने छात्रों से उनकी समस्याएं भी जानीं और सुधार संबंधी सुझाव आमंत्रित किए।
इसके बाद शिक्षा मंत्री ने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय रौतू की बेली का निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, स्वच्छता, भोजन, आवासीय सुविधाओं और सुरक्षा की विस्तृत समीक्षा की। छात्राओं से संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी बालिका शिक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करे।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आवासीय विद्यालयों में सुविधाओं की कोई कमी न रहने दी जाए और वहां सांस्कृतिक व रचनात्मक गतिविधियों को और अधिक प्रोत्साहित किया जाए, ताकि बालिकाएं आत्मनिर्भर बनकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें।



