थत्यूड

थत्यूड़ ने खुद रची सामाजिक बदलाव की कहानी

शादी-ब्याह में दिखावे और नशे पर लगेगा ब्रेक, केन्द्रीय विद्यालय की उम्मीद जगी

रिपोर्ट  — मुकेश रावत 

थत्यूड़। पहाड़ की सादगी, संस्कार और सामाजिक मर्यादाओं को फिर से जीवित करने की दिशा में थत्यूड़ क्षेत्र ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। जिला पंचायत वार्ड 13 ख्यार्शी के अंतर्गत आने वाली सभी ग्राम पंचायतों की आम बैठक रविवार को राजकीय इंटर कॉलेज क्यारी में आयोजित हुई, जिसने पूरे क्षेत्र में सामाजिक बदलाव की नई अलख जगा दी।


फिजूलखर्ची और नशे के खिलाफ एकजुट हुआ समाज

बैठक की संयुक्त अध्यक्षता जिला पंचायत सदस्य सविता देवी और उत्तराखंड सरकार के सेवानिवृत्त उपनिदेशक चेतन नौटियाल ने की। जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि क्षेत्र अब सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ खुलकर खड़ा हो चुका है।

वक्ताओं ने कहा कि शादी-ब्याह और पारिवारिक आयोजनों में बढ़ती फिजूलखर्ची, दिखावा और नशे की प्रवृत्ति ने आम परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है। सामाजिक दबाव में कर्ज लेना अब आम होता जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए घातक साबित हो सकता है।


शराब, डीजे और दिखावे पर सख्त फैसला

लंबी और गंभीर चर्चा के बाद सर्वसम्मति से कई अहम निर्णय लिए गए। तय किया गया कि अब क्षेत्र में होने वाले विवाह, मेहंदी, जन्मदिन और अन्य आयोजनों में अंग्रेजी शराब, बीयर और कॉकटेल पर पूरी तरह रोक रहेगी। कच्ची शराब की बिक्री को सामाजिक अपराध मानते हुए उसके खिलाफ सामूहिक सख्ती का संकल्प लिया गया।

इसके साथ ही देर रात तक चलने वाले तेज आवाज वाले डीजे पर भी लगाम कस दी गई। निर्णय लिया गया कि रात 12 बजे के बाद डीजे बजाने की अनुमति नहीं होगी, ताकि बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को राहत मिल सके।


सादगी को मिलेगा सम्मान, नियम तोड़ने वालों पर बहिष्कार

बैठक में यह स्पष्ट संदेश भी दिया गया कि शादी समारोहों में अनावश्यक तामझाम और दिखावा अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीमित आभूषण, सादे आयोजन और पारंपरिक मूल्यों को अपनाने पर सहमति बनी। सामाजिक नियमों की अनदेखी करने वालों के लिए चेतावनी भी साफ रही—ऐसे लोगों का सामाजिक स्तर पर बहिष्कार किया जाएगा और उनके आयोजनों से दूरी बनाई जाएगी।


शिक्षा को लेकर जगी नई उम्मीद

सामाजिक सुधार के साथ-साथ शिक्षा के मुद्दे पर भी बैठक में बड़ी पहल हुई। क्षेत्र में केन्द्रीय विद्यालय खोलने की मांग को मजबूती से उठाया गया। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने विद्यालय के लिए भूमि उपलब्ध कराने पर सहमति जताते हुए इसे क्षेत्र के बच्चों के भविष्य से जोड़कर देखा। बैठक में यह माना गया कि बेहतर शिक्षा ही स्थायी सामाजिक बदलाव की असली कुंजी है।


300 से अधिक लोगों की भागीदारी, बनी मिसाल

बैठक में विभिन्न ग्राम सभाओं से 300 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। ग्राम प्रधानों, शिक्षकों, समाजसेवियों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने इस पहल को खास बना दिया। प्रधान गीता देवी, दीक्षा लेखवार, मंजीता देवी, निकिता, चंद्रा देवी, पूनम, ममता देवी, श्वेता देवी, रिजमोहन रांगड़, शिक्षक अनिल रांगड़, डॉक्टर आचार्य रविन्द्र दत्त लेखवार, सूर्य सिंह पवार, पीडी जौनपुरी, रमेश लेखवार, शिवदास सुमन, रौछेला, प्रताप सिंह पवार, रत्न मणि भट्ट, जनक बिष्ट, चेतन चमोली, राजेश प्रसाद सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।


खुद से बदलाव की शुरुआत

बैठक के अंत में एक स्वर में कहा गया कि अगर समाज को बदलना है, तो शुरुआत हमें खुद से करनी होगी। थत्यूड़ की यह सामूहिक पहल आने वाले समय में पूरे जौनपुर क्षेत्र के लिए एक मिसाल बनेगी—जहां सादगी, संस्कार और शिक्षा को फिर से उनका सम्मान मिलेगा।

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