थत्यूड

टिहरी के आचार्य लेखवार को काशी हिन्दी विद्यापीठ से विद्या-वाचस्पति मानद उपाधि

धार्मिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान पर मिला सम्मान

रिपोर्ट—मुकेश रावत 

थत्यूड़ (टिहरी गढ़वाल)। जौनपुर ब्लॉक के थत्यूड़ क्षेत्र अंतर्गत ग्राम ओंतड़ निवासी, प्रख्यात भागवताचार्य एवं साहित्य साधक डॉ. आचार्य रविंद्र दत्त लेखवार को एक बड़ी उपलब्धि प्राप्त हुई है। काशी हिन्दी विद्यापीठ, वाराणसी द्वारा उन्हें विद्या-वाचस्पति (पीएचडी समकक्ष) मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। इस सम्मान से पूरे क्षेत्र में हर्ष और गौरव का वातावरण है।

भारतीय संस्कृति और हिंदी सेवा के लिए मिला गौरव

यह मानद उपाधि डॉ. लेखवार को भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म, हिंदी भाषा सेवा, सारस्वत साधना तथा कला के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन एवं उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान की गई है। विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद की संस्तुति के पश्चात इस सम्मान को विधिवत स्वीकृति दी गई।

राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को मिला मान

परिवर्तन योगेश संस्थान की ओर से जारी चयन पत्र में उल्लेख किया गया है कि डॉ. आचार्य रविंद्र दत्त लेखवार की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित प्रतिष्ठा तथा हिंदी भाषा और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान को देखते हुए यह सम्मान प्रदान किया गया। चयन प्रक्रिया काशी हिन्दी विद्यापीठ के समक्ष प्रस्तुत की गई, जिस पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी मुहर लगाई।

भागवत कथा और साहित्य के माध्यम से समाज को दी दिशा

डॉ. लेखवार लंबे समय से भागवत कथा, प्रवचन, साहित्य लेखन एवं सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से समाज को नैतिक एवं सांस्कृतिक दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। उनके इस सम्मान से क्षेत्र के सामाजिक, धार्मिक एवं साहित्यिक संगठनों में उत्साह का माहौल है। विभिन्न संगठनों ने उन्हें बधाई देते हुए इसे टिहरी गढ़वाल के लिए गौरव का क्षण बताया है।

यह सम्मान उत्तराखंड की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक

मानद उपाधि प्राप्त होने पर डॉ. आचार्य रविंद्र दत्त लेखवार ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि हिंदी भाषा, सनातन संस्कृति और उत्तराखंड की सांस्कृतिक चेतना का सम्मान है।

उन्होंने कहा कि काशी हिन्दी विद्यापीठ जैसी प्रतिष्ठित संस्था द्वारा विद्या-वाचस्पति की मानद उपाधि प्रदान किया जाना उनके लिए गौरव के साथ-साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। यह सम्मान उन्हें हिंदी सेवा, भागवत परंपरा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के कार्य को और अधिक निष्ठा के साथ आगे बढ़ाने की प्रेरणा देगा।

नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश

डॉ. लेखवार ने कहा कि आज सनातन संस्कृति, भारतीय दर्शन और हिंदी साहित्य वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। ऐसे समय में यह सम्मान नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और उन्हें आत्मसात करने का संदेश देता है।

गुरुओं और शुभचिंतकों को समर्पित किया सम्मान

उन्होंने परिवर्तन योगेश संस्थान एवं काशी हिन्दी विद्यापीठ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे इस सम्मान को अपने गुरुओं, शिष्यों एवं उन सभी शुभचिंतकों को समर्पित करते हैं, जिन्होंने उनके साहित्यिक और आध्यात्मिक सफर में निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!