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ASHA कार्यकर्ता स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़, प्रभावी मेंटरिंग से होगी सेवाओं की मजबूती : डॉ. रश्मि पंत

NHM उत्तराखंड में स्टेट ASHA मेंटरिंग ग्रुप कोर समिति की बैठक, संरचित ढांचे पर हुआ मंथन

देहरादून, 19 जनवरी। राज्य के स्वास्थ्य तंत्र की नींव मानी जाने वाली ASHA कार्यकर्ताओं की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तराखंड ने अहम पहल की है। सोमवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखंड द्वारा स्टेट ASHA मेंटरिंग ग्रुप कोर समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मिशन की निदेशक डॉ. रश्मि पंत ने की।

 

बैठक में ASHA कार्यक्रम के सुदृढ़ीकरण, क्षमता संवर्धन एवं परिणामोन्मुख कार्यप्रणाली पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर डॉ. रश्मि पंत ने कहा कि ASHA कार्यकर्ता समुदाय और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच सेतु का कार्य करती हैं। प्रभावी एवं संरचित मेंटरिंग के माध्यम से उनकी कार्यकुशलता बढ़ाकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लक्ष्यों को अधिक प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकता है।

 

बैठक के दौरान सहायक निदेशक (कम्युनिटी प्रोसेसेज़) डॉ. अजय कुमार नागरकर ने ASHA कार्यक्रम पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि ASHA कार्यकर्ता विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत समुदाय स्तर पर रोकथाम, स्वास्थ्य संवर्धन एवं जागरूकता का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सुनियोजित मेंटरिंग से ASHA कार्यकर्ताओं की क्षमताओं को और निखारा जा सकता है।

 

डॉ. रश्मि पंत के मार्गदर्शन में यह निर्देश दिए गए कि ASHA मेंटरिंग के माध्यम से VHND, PLA बैठकों, जन आरोग्य समितियों एवं अन्य सामुदायिक मंचों पर उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं का अधिकतम लाभ सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही Program Specific दृष्टिकोण अपनाते हुए राज्य में ASHA मेंटरिंग समूह की कार्यप्रणाली को और अधिक सशक्त बनाने पर सहमति बनी।

 

बैठक में ऑन-साइट मेंटरिंग को मजबूत करने के लिए एक व्यवस्थित एवं संरचित मेंटरिंग ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया गया। इसके अंतर्गत तकनीकी मानकों का निर्धारण, जिला, ब्लॉक एवं फील्ड स्तर पर बेहतर समन्वय, सतत निगरानी तथा प्रभावी फीडबैक तंत्र विकसित करने का निर्णय लिया गया।

 

इस अवसर पर AIIMS ऋषिकेश से सामुदायिक चिकित्सा विभाग की प्रमुख डॉ. वार्तिका सक्सेना एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. सुमित सिंह ने ASHA मेंटरिंग के लिए संरचित फ्रेमवर्क पर आधारित तकनीकी प्रस्तुति दी। उन्होंने वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्पष्ट ढांचा और नियमित मूल्यांकन से ASHA कार्यकर्ताओं की भूमिका और अधिक प्रभावशाली बनाई जा सकती है।

 

बैठक में विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि मेंटरिंग प्रक्रिया में स्थानीय आवश्यकताओं, भौगोलिक परिस्थितियों एवं सामाजिक संरचना को ध्यान में रखते हुए योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाए, ताकि जमीनी स्तर पर बेहतर परिणाम सामने आ सकें। बैठक में डॉ. कौशिकी, डॉ. अंकित, डॉ. हिमांशु, डॉ. पल्लवी धौलाखंडी, श्रीमती सीमा मेहरा सहित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं संबद्ध संस्थानों के अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

 

अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया कि ASHA मेंटरिंग प्रणाली को सुदृढ़ बनाकर न केवल जनस्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि समुदाय की भागीदारी बढ़ेगी और राज्य के प्रत्येक नागरिक तक स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी पहुँच सुनिश्चित की जा सकेगी।

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