राजकीय महाविद्यालय थत्यूड़ में ‘उत्तराखंड के गांधी’ स्व. इन्द्रमणि बडोनी की 100वीं जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई
राज्य आंदोलन के पुरोधा के विचारों से रूबरू हुए छात्र, अहिंसक संघर्ष और सादगीपूर्ण जीवन पर डाला गया प्रकाश

थत्यूड़। राज्य आंदोलन के अग्रदूत एवं ‘उत्तराखंड के गांधी’ के रूप में विख्यात स्व. इन्द्रमणि बडोनी की 100वीं जयंती के अवसर पर आज राजकीय महाविद्यालय थत्यूड़ में श्रद्धा एवं गरिमा के साथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शासन के निर्देशानुसार आयोजित इस समारोह में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं सहित शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
चित्र पर माल्यार्पण, भावपूर्ण श्रद्धांजलि
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय परिवार द्वारा स्व. बडोनी के चित्र पर माल्यार्पण कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुआ। इसके पश्चात आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने उनके संघर्षमय जीवन और राज्य निर्माण में दिए गए अमूल्य योगदान को स्मरण किया।
विचार गोष्ठी में जीवन और संघर्ष पर प्रकाश
हिंदी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शीला बिष्ट ने मुख्य वक्ता के रूप में स्व. बडोनी के प्रेरणादायी जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने अहिंसा और सादगी को अपना मार्ग बनाकर जन-आंदोलन का नेतृत्व किया। उनके विचार आज भी समाज और युवाओं के लिए मार्गदर्शक हैं।
युवाओं तक विचारधारा पहुंचाना नैतिक दायित्व : प्राचार्य
महाविद्यालय के प्राचार्य विजेंद्र लिंगवाल ने अपने संबोधन में कहा कि स्व. बडोनी का त्याग और बलिदान अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा, “यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी है कि हम युवा पीढ़ी को उनके योगदान और विचारधारा से अवगत कराएं।” साथ ही छात्रों से उनके सादगीपूर्ण जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
कुशल संचालन और सफल आयोजन
कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. भारती नौटियाल ने किया। कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. उर्वशी पंवार एवं डॉ. गुलनाज फातिमा रहीं, जिनके मार्गदर्शन में आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
शिक्षक, कर्मचारी और छात्र रहे मौजूद
इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से डॉ. संदीप कश्यप, डॉ. राजेश सिंह, डॉ. संगीता कैंतुरा, डॉ. नीलम, डॉ. अंचला, डॉ. संगीता सिडोला, डॉ. संगीता खड़वाल, डॉ. बिट्टू सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और कार्यालय स्टाफ मौजूद रहा।



