जनसमस्या

एक और गांव आने का “रैबार” और दूसरी और मूलभूत सुविधाओं का आकाल।



थत्यूड़ | आजादी के 70 साल बाद भी पत्थर खंड मध्ये आलूचक फिडोगी का डांडा सड़क से वंचित है यहां के किसान नगदी फसल अपने सर पर लाद कर लाते हैं।अब अगर हम बात करे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की तो उन्होंने रैबार कार्यक्रम में कहा कि हम उत्तराखण्ड के संतुलित विकास पर ध्यान दे रहे है इसी मकसद से राज्य उत्तराखण्ड बनाया गया था। एक तरफ सरकार पलायन रोने की बात कर रहे है और दूसरी तरफ ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं से वचित रखा जा रहा है | 
अब अगर हम इन किसानो की बात करे तो यदि कोई बीमार हो जाये तो उसे तीन चार किलोमीटर चढाई चढ़कर डंडी पर लाना पड़ता है और कभी कभी बीमार व्यक्ति को सड़क तक लाते-लाते ही वह दम तोड़ देता है। प्रदेश में कई सरकारें बदली मगर यहां की सुरत आज भी नहीं बदली। यहाँ के किसान महाबीर सिंह, उमेद सिंह सिनवाल कुलबीर सिंह पुर्व प्रधान आदि का कहना है कि उन्होंने शासन प्रशासन से कई बार लिखित तथा मौखिक रूप में गुहार लगाई है लेकिन अधिकारी और सरकार इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं हैं। अगर सरकार इस ओर अपना रवय्या साफ नही करती है तो जल्द ही एक उग्र जनआंदोलन किया जाएगा।

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