जिले के 76 जर्जर स्कूल भवन एक झटके में होंगे ध्वस्त
नौनिहालों की जान से कोई समझौता नहीं; डीएम की सख्ती से तेज हुई कार्रवाई

- सीएम के निर्देश पर बड़ा फैसला
देहरादून, 18 जनवरी । मुख्यमंत्री के स्पष्ट और सख्त निर्देशों के बाद जिले में वर्षों से जर्जर हालत में पड़े विद्यालय भवनों को लेकर जिला प्रशासन ने ऐतिहासिक और निर्णायक कदम उठाया है। बच्चों की जान को जोखिम में डाल रहे 76 विद्यालय भवनों को निष्प्रोज्य घोषित करते हुए उनके ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया एक साथ शुरू की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि नौनिहालों के जीवन से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
डीएम की सख्ती से 10 दिन में सामने आई 100 स्कूलों की रिपोर्ट
जिलाधिकारी सविन बंसल की सख्ती का असर यह रहा कि लंबे समय से लंबित जर्जर स्कूल भवनों की रिपोर्ट महज 10 दिनों के भीतर सामने आ गई। शिक्षा विभाग द्वारा 100 विद्यालयों के जर्जर भवनों की विस्तृत रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी गई। रिपोर्ट में देरी पर डीएम ने कड़ा रुख अपनाया था, जिसके बाद संबंधित विभागों में हलचल तेज हुई।
79 विद्यालय पूर्णतः निष्प्रोज्य, 17 आंशिक रूप से खतरनाक
रिपोर्ट के अनुसार जनपद में कुल 79 विद्यालय भवन पूर्णतः निष्प्रोज्य पाए गए हैं। इनमें 13 माध्यमिक और 66 प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। इसके अलावा 17 विद्यालय भवन आंशिक रूप से निष्प्रोज्य घोषित किए गए हैं, जबकि 8 विद्यालय ऐसे हैं जिनमें ध्वस्तीकरण की आवश्यकता नहीं पाई गई।
63 स्कूलों में वैकल्पिक व्यवस्था, 16 पर प्रशासन सख्त
जर्जर भवनों में पढ़ रहे बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 63 विद्यालयों में पठन-पाठन की वैकल्पिक व्यवस्था पहले ही सुनिश्चित कर दी गई है। शेष 16 विद्यालयों में तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित किए किसी भी स्कूल का ध्वस्तीकरण नहीं किया जाएगा।
ध्वस्तीकरण के लिए ₹1 करोड़ स्वीकृत, लोनिवि को एस्टिमेट के निर्देश
जिलाधिकारी के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) को पूर्ण एवं आंशिक निष्प्रोज्य भवनों के आंगणन (एस्टिमेट) तैयार करने को कहा गया है। इस कार्य के लिए ₹1 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है, ताकि ध्वस्तीकरण और सुरक्षा उपायों में किसी प्रकार की देरी न हो।
जोखिम वाले भवनों में पढ़ाई नहीं, सुरक्षा सर्वोपरि
जिलाधिकारी ने दो टूक कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी हालत में जोखिमपूर्ण भवनों में शिक्षण कार्य संचालित नहीं होगा। आंशिक रूप से निष्प्रोज्य भवनों में आवश्यक मरम्मत, प्रतिबंध और सुरक्षा मानकों के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।
समयबद्ध और जवाबदेह होगी पूरी प्रक्रिया
जिला प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि यह पूरी कार्रवाई समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से पूरी की जाएगी। वर्षों बाद पहली बार जिले में जर्जर स्कूल भवनों को लेकर ठोस पहल होने से अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है।



