गांव लौटे युवा ने बदली पंतवाड़ी की तस्वीर
नागटिब्बा ट्रेक के बेस कैंप पर ‘The Evas Rural Jungle’ बना स्वरोज़गार और स्थानीय रोजगार का मॉडल

थत्यूड (टिहरी)। नागटिब्बा ट्रेक का बेस कैंप पंतवाड़ी पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बदलता हुआ नज़र आ रहा है। बेहतर सड़कें, सुव्यवस्थित ट्रेक रूट और राज्य सरकार की पर्यटन-केन्द्रित नीतियों ने इस छोटे से पहाड़ी गांव को नई पहचान दी है। जो पंतवाड़ी कभी सिर्फ ट्रेकर्स का पड़ाव भर था, वह आज युवाओं के लिए गांव में रहकर करियर बनाने का अवसर बन चुका है।
इस बदलाव की सबसे सशक्त मिसाल हैं विमल रमोला, जिन्होंने विदेश में अस्थायी नौकरी छोड़कर अपने गांव लौटने का साहसिक निर्णय लिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पर्यटन नीतियों और नागटिब्बा क्षेत्र में बढ़ते ट्रेकिंग पर्यटन ने उन्हें यह भरोसा दिलाया कि पहाड़ में भी स्थायी और सम्मानजनक रोजगार संभव है।
चार टेंट से शुरू हुआ सफर, आज बना पहचान
वर्ष 2022 में विमल रमोला ने कैंपिंग और ट्रेकिंग प्रोजेक्ट “The Evas Rural Jungle” की शुरुआत की। शुरुआत बेहद सीमित संसाधनों के साथ हुई—सिर्फ चार टेंट, सीमित बजट और भविष्य को लेकर कई सवाल। लेकिन नागटिब्बा पर लगातार बढ़ते ट्रेकर्स की संख्या और सरकार द्वारा किए गए आधारभूत सुधारों—बेहतर सड़कें, सुरक्षित ट्रेक रूट और पर्यटन पर स्पष्ट फोकस—ने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया।
आज 150–200 ट्रेकर्स हर माह, 15 युवाओं को स्थायी रोजगार
कुछ ही महीनों में The Evas Rural Jungle ने उम्मीद से कहीं तेज़ रफ्तार पकड़ी। आज इस कैंप के पास 10 से अधिक टेंट हैं और हर महीने 150 से 200 ट्रेकर्स यहां ठहरते हैं। इससे सीधे तौर पर 12 से 15 स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार मिला है।
विमल रमोला अब हर महीने ₹80,000 से ₹1,00,000 तक की आय अर्जित कर रहे हैं, जो उनकी विदेश की अनिश्चित नौकरी की तुलना में कहीं अधिक स्थिर और संतोषजनक है।
एक उद्यम, पूरे गांव को मिला लाभ
इस पहल का सबसे बड़ा असर यह रहा कि विमल की सफलता व्यक्तिगत न रहकर सामूहिक बन गई। The Evas Rural Jungle से जुड़कर ट्रेक गाइड, वाहन चालक, पोनी व खच्चर मालिक, कैरियर और स्थानीय सप्लायरों को नियमित काम मिलने लगा।
आज नागटिब्बा ट्रेक पर जाने वाला हर ट्रेकर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पंतवाड़ी के कई परिवारों की आय बढ़ा रहा है। अनुमान के अनुसार करीब 40 से 50 लोग पर्यटन से जुड़े विभिन्न कार्यों के माध्यम से रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।
पंतवाड़ी बना ‘वाइब्रेंट विलेज’
पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से पंतवाड़ी की स्थानीय अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा आई है। नए कैंप और होमस्टे खुल रहे हैं, सब्ज़ी, दूध, राशन और वाहनों की मांग बढ़ी है। सबसे अहम बात यह है कि गांव के युवाओं को अब रोजगार के लिए पलायन नहीं करना पड़ रहा—उन्हें गांव में ही भविष्य दिखाई देने लगा है।
पहाड़ सिर्फ यादों की जगह नहीं
विमल रमोला और The Evas Rural Jungle की कहानी यह साबित करती है कि पहाड़ केवल स्मृतियों या पर्यटन तक सीमित नहीं हैं। सही नीतियां, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग और युवाओं की मेहनत मिलकर पहाड़ी गांवों को रोजगार और उद्यमिता के केंद्र में बदल सकते हैं।
आज पंतवाड़ी सच मायनों में एक वाइब्रेंट विलेज बन चुका है—जहां लोग गांव छोड़ने की नहीं, बल्कि गांव में रहकर अपनी पहचान बनाने की सोच रहे हैं।



