
रिपोर्ट—मुकेश रावत
थत्यूड (टिहरी)। दुगड्डा–बंगशील मोटर मार्ग की हालत ऐसी हो चुकी है कि सड़क कम और गड्ढों की बारात ज़्यादा लगती है। पांच किलोमीटर का सफर मानो पांच घंटे की परीक्षा—कभी बाइक फिसल जाए, कभी कार के पहिये गड्ढों में गायब हो जाएं।
लोकल लोग तो कह ही रहे—
“सड़क नहीं है भाई, ये तो हमारा रोज़ का ‘अडवेंचर स्पोर्ट्स’ बन गया है।”
पर्यटक भी दुखी—पहाड़ घूमने आए थे, झूले झूलते-झूलते वापिस लौट रहे
नागटिब्बा और देवलसारी जैसे फेमस ट्रैक के लिए यही मुख्य रास्ता है, पर सड़क की हालत देखकर पर्यटक भी सिर पकड़ लेते हैं।
कई तो बोलते—
“ट्रैकिंग बाद में करेंगे, पहले इस सड़क पर ‘डेंजर ट्रैक’ पूरा कर लें।”
गांव वाले नेताओं पर बरसे—“वोट माँगने आते हैं, सड़क बनाने नहीं!”
गांव के पूर्व प्रधान महावीर राणा, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य सोमवारी लाल नौटियाल, प्रेम सिंह राणा, कमल किशोर नौटियाल, लाखी सिंह परमार, विक्रम सिंह परमार और भगत सिंह रावत ने कड़ा तंज कसते हुए कहा—
“नेता जी चुनाव के टाइम तो ऐसे आते हैं जैसे सड़क वही खुद बनाकर देंगे… और चुनाव खत्म होते ही चार साल का मौन व्रत धारण कर लेते हैं।”
ग्रामीणों का साफ कहना है—
“अब बस! सड़क चाहिए, भाषण नहीं।”
PWD ने दिया भरोसा… पर वो वाला पुराना वाला—‘फाइल भेज दी गई है’
लोक निर्माण विभाग थत्यूड के एई नवीन शर्मा ने बताया कि सड़क सुधार और डामरीकरण का एस्टीमेट शासन को भेज दिया गया है।
लोगों का कहना है—
“ये ‘एस्टीमेट भेज दिया’ वाली लाइन तो हम पिछले तीन साल से सुन रहे… अब तो भेजते-भेजते एस्टीमेट भी थक गया होगा।”
नवीन शर्मा ने कहा कि नए वित्तीय वर्ष में स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।
ग्रामीणों ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा—
“उम्मीद पर दुनिया कायम है… और नेता जी भी।”


