फिजूलखर्ची पर पहाड़ का फैसला: शादियों को सादगी और संस्कार में बांधने की पहल
लोक-संस्कृति बचाने को नैनबाग क्षेत्र में मजबूत सामाजिक पहल

थत्यूड़ (टिहरी) पहाड़ की सादगी, संस्कार और लोक-परंपराओं को बचाने की दिशा में नैनबाग क्षेत्र से एक अनुकरणीय सामाजिक पहल सामने आई है। शादियों में बढ़ती फिजूलखर्ची, दिखावे और कुरीतियों पर रोक लगाने को लेकर लोक निर्माण विभाग कार्यालय जाखधार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में लालूर क्षेत्र के प्रबुद्धजनों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और 21 गांवों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर समाज सुधार का संकल्प लिया।
आधुनिकता के नाम पर बढ़ता खर्च बना चिंता का विषय
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में विवाह समारोह अनावश्यक खर्च और प्रदर्शन का माध्यम बनते जा रहे हैं। इसका सीधा असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है, जो सामाजिक दबाव के चलते कर्ज के बोझ तले दबने को मजबूर हैं। इसी चिंता के बीच विवाह को सरल, सुसंस्कृत और परंपरागत स्वरूप में लौटाने पर गंभीर मंथन किया गया।
मेहंदी कार्यक्रमों पर पूर्ण प्रतिबंध, अंग्रेजी शराब पर सख्ती
विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से शादियों में मेहंदी कार्यक्रमों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पारित किया गया। साथ ही विवाह समारोहों में अंग्रेजी शराब के परोसने पर सख्त पाबंदी लगाने पर भी सहमति बनी।
हालांकि, क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए पारंपरिक स्थानीय पेय (सुर) को इस प्रतिबंध से बाहर रखने का निर्णय लिया गया।
मामा पक्ष की रस्मों में बड़ा बदलाव, दिखावे पर लगेगी लगाम
सामाजिक समानता और आर्थिक संतुलन कायम करने के उद्देश्य से मामा पक्ष (मौखी) से जुड़ी परंपराओं पर भी अहम निर्णय लिए गए। तय किया गया कि अब मामा पक्ष की ओर से केवल एक बकरा और सामूहिक पिठाई दी जाएगी। इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार के उपहार, वस्तु या नकद लेन-देन को पूरी तरह समाप्त किया जाएगा।
इस फैसले को समाज में आर्थिक न्याय और समानता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
डीजे-साउंड पर समय-सीमा तय करने पर मंथन
बैठक में डीजे और साउंड सिस्टम के बढ़ते चलन पर भी चिंता जताई गई। ध्वनि प्रदूषण और सामाजिक असंतुलन को देखते हुए डीजे बजाने के लिए निश्चित समय-सीमा तय करने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई, ताकि विवाह समारोह शालीनता और मर्यादा के दायरे में संपन्न हों।
21 गांवों की समिति गठित, गांव-गांव पहुंचेगा संवाद
प्रस्तावों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए बैठक में एक समिति का गठन किया गया। समिति में 21 गांवों से 2-2 प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। ये प्रतिनिधि अपने-अपने गांवों में जाकर ग्रामीणों से संवाद करेंगे और सामाजिक सुधार के प्रस्तावों पर औपचारिक सहमति जुटाएंगे।
28 दिसंबर को अगली बैठक, अंतिम फैसले की तैयारी
बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी गांवों से राय और सहमति सामने आने के बाद 28 दिसंबर को अगली बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में प्रस्तावों पर गहन मंथन कर अंतिम निर्णय लिए जाएंगे।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पहाड़ के कितने गांव इस समाज सुधार की मुहिम में आगे आकर इसे सामूहिक संकल्प का रूप देते हैं।
आने वाली पीढ़ियों के लिए सादगी और संस्कारों की मजबूत दस्तक
यह पहल केवल शादियों की फिजूलखर्ची पर रोक लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पहाड़ की सादगी, संस्कार और सांस्कृतिक पहचान को सहेजने की एक मजबूत सामाजिक पहल के रूप में देखी जा रही है।
नैनबाग क्षेत्र से उठी यह आवाज यदि व्यापक समर्थन पाती है, तो पहाड़ के सामाजिक ताने-बाने में एक सकारात्मक और स्थायी बदलाव की मिसाल बन सकती है।



