थत्यूड

थत्यूड़ में अंधेरे की सरकार — कैमरे सोए, लाइटें खोईं, जनता रोई

विधायक निधि से लगे थे कैमरे, अब दिखाते हैं सिर्फ जंग; स्ट्रीट लाइटें बुझीं तो चोरों की बल्ले-बल्ले, जनता परेशान

REPORT–MUKESH RAWAT 

थत्यूड़: थत्यूड़ बाजार में सुरक्षा व्यवस्था पर मोटी धूल जम चुकी है। कभी सुरक्षा की ‘आंख’ कहे जाने वाले सीसीटीवी कैमरे अब खुद अंधे हो चुके हैं। 2017-18 में विधायक प्रीतम सिंह पंवार की निधि से लगाए गए ये कैमरे आज शोपीस बनकर बाजार की मुख्य चौक में शर्मसार खड़े हैं।
विकासखंड जौनपुर के मुख्य बाजार में हालात ऐसे हैं कि चोरी की घटनाएं आम हो गई हैं, लेकिन कैमरे सिर्फ देखते रह जाते हैं — वो भी तब, जब उन पर जमी धूल हटाई जाए! पुलिस के पास शिकायतें पहुंचती हैं, पर सबूत नहीं। आखिर कैमरे भी तो सांस नहीं ले रहे।
उधर, जिला पंचायत की मेहरबानी से लगीं स्ट्रीट लाइटें भी ‘रिटायरमेंट’ ले चुकी हैं। रात को बाजार किसी भूतिया फिल्म के सेट जैसा दिखता है — अंधेरा, सन्नाटा और चोरी का खतरा। लाइटों की बैटरियां भी कब की चोरी हो गईं, मगर अफसर अब तक “कार्यवाही पर विचाराधीन” मोड में हैं।
व्यापारी जगत सिंह असवाल, दिनेश रावत, सुरेंद्र कोहली, राहुल, मिथिलेश चमोली, कपिल लेखवार और कुलदीप असवाल बताते हैं — “दो साल से बार-बार अधिकारियों और व्यापार संघ को कहा, लेकिन जवाब बस यही मिला — ‘देखेंगे’।” अब बाजार वाले तंग आ चुके हैं और जिला पंचायत से तत्काल मरम्मत की मांग कर रहे हैं।
व्यापार मंडल को बने दो साल बीत गए, लेकिन न किसी मीटिंग में रोशनी हुई, न बाजार में। मंडल के अध्यक्ष अकबीर पंवार का कहना है कि कई बार टिहरी जिला पंचायत को बताया गया, पर कार्रवाई का ‘बल्ब’ अब तक नहीं जला। उन्होंने विधायक से नए कैमरे दिलाए जाने की मांग की है।
थत्यूड़ के बाजार में इस वक्त बस दो चीज़ें चमकती हैं — दुकानों की नीऑन लाइटें और प्रशासन की बेरुखी। जनता पूछ रही है — “क्या कैमरे और लाइटें अब सिर्फ उद्घाटन के लिए ही लगाई जाती हैं?”

 

मीडिया सवाल — “थत्यूड़ की रोशनी कब लौटेगी?”

  1. जब विधायक निधि से लगाए गए कैमरे अब धूल खा रहे हैं — क्या जिम्मेदारों को उनकी “अंधी आंखें” नहीं दिख रहीं?

  2. क्या सीसीटीवी सिर्फ उद्घाटन की फोटो खिंचवाने के लिए लगाए गए थे?

  3. दो साल से बाजार अंधेरे में है — क्या जिला पंचायत और व्यापार मंडल भी ‘ब्लैकआउट’ मोड में हैं?

  4. लाइटों की बैटरियां चोरी हो गईं, कैमरे बंद पड़े हैं — फिर सुरक्षा का दावा किस मुंह से?

  5. जनता पूछ रही है — “जब हर गलती पर जनता को दोष मिलता है, तो अफसरों की जिम्मेदारी कौन तय करेगा?”

  6. क्या थत्यूड़ बाजार को सुरक्षा और रोशनी के लिए फिर किसी नए उद्घाटन का इंतजार करना पड़ेगा?

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